दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा छत्तीसगढ़ में

देश का हर राज्य अपने अद्वितीय स्थलों, अनूठी संस्कृति, आदिवासी विरासत और त्योहारों से युक्त है। ऐसे में लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए, पर्यटन मंत्रालय के देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला के अंतर्गत छत्‍तीसगढ़ का छिपा खजाना’ प्रदर्शित किया। देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला एक भारत, श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत भारत की समृद्ध विविधता को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है।
पर्यटन क्षमता की अपार संभावनाओं से लैस छत्तीसगढ़ 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर अस्तित्व में आया और यह भारत का 9वां सबसे बड़ा राज्य है। भारत का मध्य पूर्वी राज्य होने के नाते, यह 7 राज्यों की सीमाओं से लगा है, 44 फीसदी भूमि वनों से ढकी हुई है। करीब 34 प्रतिशत आदिवासी आबादी है। 3 राष्ट्रीय उद्यानों, 11 वन्यजीव अभयारण्यों, 1 जैव क्षेत्र के साथ यह भारत के सबसे हरे भरे राज्य में से एक है और हवाई, रेल और सड़क नेटवर्क द्वारा देश के बाकी हिस्सों से जुड़ा हुआ है।
देश के कुछ सबसे अच्छे झरने छत्तीसगढ़ में हैं। उनमें से कुछ चित्रकोट, अमृतधारा, पवई, मचली इत्यादि हैं। छत्तीसगढ़ को तीन शक्तिपीठों चंपारण्य, राजिम और शिवरीनारायण के होने का सौभाग्‍य प्राप्‍त है। गढ़ा रॉट आयरन, बेल मैटल और टेराकोटा छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध हस्तशिल्प हैं।

राज्य का बस्तर अनछुए स्थलों में से एक है, जो छत्तीसगढ़ के दक्षिण में है। बस्तर क्षेत्र में शानदार प्राकृतिक दृश्य, सड़कें और छिपे हुए झरने हैं। बस्तर क्षेत्र में 15 से अधिक झरने हैं। कोटमसर गुफाएँ, जो मेघालय के बाद गुफाओं की सबसे बड़ी श्रृंखला है ,छत्तीसगढ़ में हैं। 75 दिनों तक मनाया जाने वाला बस्तर का दशहरा दुनिया का सबसे लंबा त्यौहार है। जिसमें धंतेश्वरी देवी से संबंधित एक अलग कहानी है। गोंड, मड़िया, मुरियाया कुछ ऐसी जनजातियाँ हैं, जो बस्तर को स्वदेशी जनजातियों की भूमि के रूप में बनाती हैं।
हस्तशिल्प का इतिहास हड़प्पा सभ्यता के समय का है, इस्‍तेमाल की जाने वाली तकनीक खो चुकी मोम तकनीक है। दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी भगवान गणेश की प्रतिमा है जो एक रेत के पत्थर से बनी है। 12000 वर्षों के इतिहास के साथ गुफा चित्र बस्तर क्षेत्र में हैं।
छत्‍तीसगढ़ में कुछ स्थल ऐसे हैं जिनसे पर्यटक परिचित ही नहीं है। ऐसा ही एक स्थल है कर्कभाट –बड़े पत्‍थर वाला (मेगालिथिक) दफन स्थल जिसे आमतौर पर पर्यटकों द्वारा अनदेखा किया जाता है।
इसी तरह दिपाडीह है जो 7वीं शताब्दी का मंदिर परिसर संभवतः छत्तीसगढ़ का सबसे अच्छा रखा गया पुरातात्विक रहस्य है। प्रवेश द्वार के बगल में पथ के किनारे उत्कीर्ण पत्थर के स्तंभ बनाए गए हैं, जिन पर पौराणिक जीवों को दर्शाया गया है। इसी क्रम में घोटुल- यह शिक्षा की एक प्राचीन जनजातीय प्रणाली है और साथ ही इसकी अपनी लाट पादरी व्‍यवस्‍था के साथ अपनी परिसर व्‍यवस्‍था है। इस तरह छत्तीसगढ़ वाकई में अनेक खजाने का भंडार है।

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