बिलकिस बानो गैंगरेप केस में जेल से रिहा हुए दोषियों का इस अंदाज हुआ स्वागत
गुजरात के गोधरा दंगों के समय बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था और इसके बाद आरोपियों ने उसके परिवार के 7 लोगों की हत्या तक कर दी। अब इस मामले में 11 दोषियों की रिहाई हो गई है। बिलकिस बानो केस 3 मार्च 2002 का है। गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के दौरान दाहोद जिले के लिमखेड़ा तालुका के रंधिकपुर गांव में भीड़ बिलकिस बानो के घर में घुसी। परिवार पर हमला किया गया। उस समय पांच महीने की गर्भवती बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप बलात्कार किया गया और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई। बिलकिस बानो गैंगरेप मामला गुजरात दंगों का सबसे भयावह मामला था। बिलकिस उस समय 21 साल की थीं और गर्भवती थीं।
कौन है बिलकिस बनो? जिसके बलात्कारी अब हुए जेल से रिहा!
गोधरा गुजरात दंगों के बाद उनके साथ गैंगरेप किया और उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया। छह अन्य सदस्य भागने में सफल रहे। इस मामले के दोषियों को 2004 में गिरफ्तार किया गया था। बिलकिस ने बताया था कि गैंगरेप के बाद वह लगभग तीन घंटे तक बेहोश रही। उसके शरीर में इतना दर्द था कि वह उठ भी नहीं पा रही थी। होश में आने के बाद किसी तरह उसने खुद को संभाला। उसके दिल में यह भी डर था कि अगर वह यहां कुछ और देर ठहरी तो वह मार दी जाएगी। वह नंगे बदन ही आगे बढ़ी और पास की एक आदिवासी महिला से कपड़े उधार लिए। एक होमगार्ड ने बिलकिस को देखा तो वह उसे लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन ले गया जहां उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
स्थानीय पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हुआ लेकिन पुलिस ने सबूतों के अभाव केस खारिज कर दिया। इसके बाद बिलकिस मानवाधिकार आयोग पहुंची और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और सीबीआई को मामले की नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया था। सीबीआई ने चार्जशीट में 18 लोगों को दोषी पाया था। इसमें 5 पुलिसकर्मी समेत दो डॉक्टर भी शामिल थे जिन्होंने आरोपी की मदद करने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप था।

बिलकिस ने किसी तरह खुद को बचाया और न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। उधर बिलकिस के परिवार वालों को लगातार धमकियां मिलती रहीं। दो साल में उन्होंने 20 बार अपना घर बदला। बिलकिस ने सुप्रीम कोर्ट ने अपना केस गुजरात से बाहर किसी दूसरे राज्य में शिफ्ट करने की गुहार लगाई। 2008 में मुंबई के एक सेशन कोर्ट ने 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इनमें से तीन ने बिलकिस के साथ रेप की बात स्वीकार की थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मई 2017 को सभी आरोपियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी और 7 दोषियों को को बरी करने का आदेश ठुकरा दिया। इसमें पुलिसकर्मी और डॉक्टर भी शामिल थे जिन्होंने सबूतों से छेड़छाड़ की थी।
कोर्ट ने सभी दोषियों को 55 हजार रुपये मुआवजे के रूप में बिलकिस को देने का आदेश दिया। इसको बाद जिन पुलिसकर्मियों को हाई कोर्ट ने जांच में दोषी पाया थाए गुजरात सरकार ने उन्हें बहाल कर दिया था। इसके बाद मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा और पुलिस कर्मियों को पेंशन सुविधा देने से रोक लगाई, साथ ही एक आईपीएस अधिकारी को डिमोट करने का आदेश दिया। एक लम्बी लड़ाई के बाद बिलकिस बानो को इंसाफ मिला था पर अब बिलकिस के दोषी समय से पहले रिहा हो चुके है।





