ज्ञानवापी विवाद पर बड़ा फैसला, कोर्ट कमिश्नर नहीं हटाए जाएंगे और दोबारा होगा सर्वे

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काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी स्थित मां श्रृंगार गौरी को लेकर उपजे विवाद पर तीन दिनों से चल रही सभी पक्षों की बहस पूरी हो गई है। आज दोपहर में वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि कोर्ट ने सर्वे के लिए नियुक्त किए गए एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नहीं हटाएंगे और साथ ही कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के तहखाने का सर्वे 17 मई से पहले कराने का आदेश दिया है।

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साल 2021 के अगस्त में 5 महिलाओं ने वाराणसी की स्थानीय अदालत में एक वाद दायर करते हुए मस्जिद परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर समेत कई विग्रहों में पूजन-दर्शन की इजाजत देने और सर्वे कराने की मांग की थी। इसके बाद अदालत ने सर्वे करने की इजाजत दी और कोर्ट के आदेश पर अब सर्वे पूरा हो चुका है। हिंदू पक्ष का कहना है कि मुगल शासक औरंगजेब ने यहां काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनाई थी लेकिन मुस्लिम पक्ष मंदिर नहीं होने का दावा करता है।

ज्ञानवापी परिसर में एडवोकेट-कमिश्नर को बदलने की मांग की गई थी। मुस्लिम पक्ष मस्जिद में हो रहे सर्वे और वीडियोग्राफी का शुरू से ही विरोध कर रहा था। सर्वे और वीडियोग्राफी रोकने की मांग की गई थी। हिंदू पक्षकार ने कहा जब यहां मंदिर नहीं है तो सर्वे करवाने में किसी को समस्या नहीं होनी चाहिए। इस मामले में हिन्दु पक्ष को बड़ी राहत मिलने से अब इस मंदिर की सच्चाई सबके सामने आने का दावा किया जा रहा है। इतिहासकार डॉ. राम प्रसाद सिंह ने दावा किया है कि 'पत्थर लगाकर दरवाजा बंद किया गया है, अगर इस दरवाजे को खोल दिया जाए तो यह गर्भ गृह दिख जाएगा। 

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