मस्जिद और मंदिर की लड़ाई से फैल रही है नफरत,जानें इसका सच

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इन दिनों लोग मंहगाई, बेरोजगारी इन मुद्दों से दूर देश की जनता मंदिर मस्जिद के विवादों में उलझी हुई है, हर दिन एक ऐसा ही मामला सामने आ रहा है पहले ज्ञानव्यापी मस्जिद विवाद, फिर मथुरा जन्मभूमि, ताजमहल विवाद और कुतुबमीनार विवाद अभी खत्म हुए भी नहीं की अब एक और विवाद खड़ा हो गया है, ये नया मामला है मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला का, यहां हिंदुओं ने मुस्लिमों के नमाज पढ़ने से रोकने तक की मांग कर दी हैं

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला का विवाद एक बार फिर सामने आ गया है. हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में धार भोजशाला को लेकर याचिका दायर की गई है जिसमें कहा गया है कि भोजशाला परिसर में फिर से मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जाए और इस परिसर की पूरी वीडियोग्राफी व कलर फोटोग्राफी की जाए, हिंदू पक्ष ने वकील हरिशंकर जैन के जरिए याचिका दायर कर पूरा परिसर हिंदुओं को देने की मांग की और नमाज पढ़ने से रोकने की अपील की है।
 नमाज पढ़ने पर लगाएं रोक, हिंदू संगठनों ने दायर की याचिका!
याचिका हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री व कुलदीप तिवारी मोहित गर्ग, आशीष गोयल, सुनील सारस्वत, रोहित खंडेलवाल ने दाखिल की है, जिसमें भोजशाला की 33 फोटो दाखिल की गई हैं. तस्वीरों में देवी-देवताओं के चित्र व संस्कृत के श्लोक लिखे हुए हैं. याचिका में मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन स्थित संग्रहालय से वापस लाने की मांग भी की गई है, वहीं इंदौर हाईकोर्ट में धार भोजशाला को लेकर तीन याचिकाएं पहले से पेंडिंग हैं और इसी बीच दो मई को एक नई याचिका दायर की गई है।

जिसपर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक रोशिया और जस्टिस अमरनाथ द्वारा एएसआई, केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किए गए हैं, एएसआई के आदेश को चुनौती देते हुए इंदौर हाईकोर्ट में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका में सुनवाई करते हुए बेंच ने भोजशाला परिसर स्थित एक मस्जिद से जुड़ी मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी को भी नोटिस जारी किया है।

आपको बतां दे कि भोजशाला भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षणद्वारा संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है, साल 2003 में एएसआई द्वारा की गई व्यवस्था के अनुसार, हिंदू हर मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करते हैं, जबकि मुसलमान शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं। 

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