जिस घर में दुल्हन बनकर आई थी मुर्मु उसे ही बना दिया स्कूल!

राज्य समाचार

द्रौपदी मुर्मू देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति चुन ली गई हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी के राष्ट्रपति चुने जाने पर विजय जुलूस निकाला गया हो। इस सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने वाली देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। NDA प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू ने UPA उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हराकर जीत हासिल की है, मुर्मू की एक क्लास मॉनिटर से महामहिम बनने तक की कहानी बड़ी दिलचस्प है..यहीं नहीं श्याम चरण मुर्मू से शादी करके जिस घर में मुर्मू दुल्हन बनकर आई उसे उन्होंने बच्चों का स्कूल बना दिया। देश के सबसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंची द्रौपदी मुर्मू जिन संघर्षों से गुजरकर इस पद तक पहुंची उन संघर्षों को बयां कर पाना शायद मुश्किल ही नामुकिन भी है, पीएम मोदी ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनने पर बधाई देते हुए लिखा-  भारत ने इतिहास लिखा है।


जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, पूर्वी भारत के सुदूर हिस्से में पैदा हुई एक आदिवासी समुदाय की बेटी को राष्ट्रपति चुना गया है। द्रौपदी मुर्मू को बधाई।द्रौपदी मुर्मू जहां 6 लाख 76 हजार 803 वैल्यू के बराबर वोट जुटाने में सफल रहीं, तो प्रतिद्वंदी यशवंत सिन्हा महज 3 लाख 80 हजार 177 वोट ही हासिल कर सके। देश का कोई ऐसा राज्य नहीं रहा, जहां मुर्मू को वोट नहीं मिले हों।द्रौपदी मुर्मू की लव स्टोरी जितनी दिलचस्प है उससे कहीं ज्यादा ही संघर्षों भरी है उनकी शादी के बाद की जिंदगी, श्याम चरण मुर्मू से शादी करके जब द्रौपदी मुर्मू पहाड़पुर गांव की बहू बन गईं, द्रौपदी और श्याम के दो बेटे और एक बेटी पैदा हुए, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था, 2010 में उनके पहले बेटे और 2013 में उनके दूसरे बेटे की मौत हो गई। इसके बाद अगले ही साल 2014 में उनके पति भी इस दुनिया को अलविदा कह गए।

सुष्मिता करने वाली है शादी तो भाई क्यों ले रहे हैं तलाक़ ?

दो जवान बेटों और पति की मौत से आहत द्रौपदी ने अपने पहाड़पुर वाले घर को स्कूल में बदल दिया। अब यहां बच्चे पढ़ाई करते हैं। द्रौपदी यहां अपने बच्चों और पति की पुण्यतिथि पर जाती हैं, बेटों और पति की मौत के बाद मुर्मू डिप्रेशन में चली गई थी तो उन्होंने अध्यात्म का सहारा लिया, शायद इसी से उन्हें पहाड़ जैसे दुखों को सहने करने की शक्ति मिली.

कमेंट करें