सीएम के सलाहकारों और संसदीय सचिवों को नहीं मिलेगी किसी प्रकार की सुविधा!

राज्य समाचार
राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संकट के समय उनके साथ खड़े विधायकों को अपना सलाहकारों बनाने का आदेश तो जारी कर दिया है। लेकिन इसके बाद विपक्ष ने उन पर गलत तरीके से उनकी नियुक्ति की है और इसको लेकर राज्यपाल को शिकायत की हैं। सीएम गहलोत ने कहा कि वह सरकार चला रहे हैं उनको इस बात का पता है कि उन्हें किस प्रकार से सरकार चलानी है।  छह सलाहकारों की नियुक्ति पर हुए विवाद के सरकार ने एक ऐसा रास्ता खोज निकाला है जो उन्हें इस विवाद से बचाने के साथ विधायकों को भी खुश रखेगा।

इस नये प्लान में सीएम के 6 सलाहकारों और भविष्य में बनाये जाने वाले संसदीय सचिवों को अब न मंत्री का दर्जा, नहीं वेतन-भत्ते और दूसरी सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी। इसी तरह से बोर्ड, निगमों में विधायकों को राजनीतिक नियुक्ति देने में इसी बात का ध्यान रखा जाएगा। इस बात पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संकेत दे दिए हैं कि इस तरह से नियुक्तियां दी जाएंगी ​जो लाभ के दायरे से बाहर हो।

सीएम के छह सलाहकारों की नियुक्ति पर राज्यपाल ने सरकार से जवाब मांगा है और जल्द ही सरकार की तरफ से जवाब भेजा जा सकता है। इस विवाद के कारण ससंदीय सचिवों की नियुक्ति रोक दी गयी है। सरकार को इस बात का पता है कि अगर यह मामाल कोर्ट में जाता है तो यह मामला अटक जाएगा। सीएम के सलाहकार अपने आप को कैबिनेट मंत्री ही मान रहे हैं। कानूनी प्रावधानों के अनुसार विधायक मंत्री को छोड़ ऐसा कोई पद नहीं ले सकते, जिसमें वेतन भत्ते सहित कोई नकद लाभ जैसी सुविधाएं मिलती हो।


यह मामला पहली बार नहीं हुआ है जब किसी सरकार को लगता है कि उनके मंत्री बनने से वंचित रहे विधायकों को संतुष्ट करने के लिए संसदीय सचिव और राजनीतिक नियुक्तियां दी जाती रही है। लेकिन अगर इस बार उनको लाभ नहीं मिलता है तो यह हथियार शायद सरकार के लिये कारगर नहीं होगा। 

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