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फिल्मी डॉन जैसी है आनंद पाल की कहानी, मरने के बाद कम नहीं हुई फैंस फॉलोइंग

प्रकाशित: Jun 24, 2022 22:26रिपोर्ट: Navtej TV

हम सब लोग फिल्मों में ही डॉन को देखते है और फिर सोचते है कि ऐसा कभी रियल लाईफ में बहुत कम बार देखने को मिलता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे रियल डॉन की कहानी बताने जा रहे हैं जो जनता के लिए हीरों और दुश्मनों के लिए काल बन जाता था। इस डॉन का नाम आनंद पाल है जो राजस्थान के नागौर जिले में पैदा हुआ था और इसके बाद उसका कारोबार विदेशों तक फेल गया।

24 जून को आनंदपाल सिंह की पुण्यतिथि होती है और आज लोग सांवराद में बड़ी संख्या में जुटकर अपने हीरो को नम आंखों से श्रद्धांजलि देते हैं। आज के दिन ब्लड डोनेशन कैंप जैसे कई कार्यक्रम होते है और समाज को बड़ा संदेश देते हैं। लेकिन आनंदपाल सिंह वह नाम था जिसके नाम से पुलिस भी कांप जाती थी और उसे पकड़ने से पहले 10 बार सोचती थी।

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लेकिन समय की मार जब इंसान पर पड़ती है तो उसका अंत बूरा होता है और ऐसा हीआनंदपाल सिंह के साथ हुआ। जेल से फरार आनंदपाल को पकड़ने के लिए पुलिस ने पूरे प्रदेश को छावनी में बदल दिया लेकिन उसे पकड़ने में वह सफल नहीं हुई लेकिन एक दिन पुलिस को आनंदपाल के ठिकाने की जानकार मिली तो पुलिस ने रातों रात ही उस जगह को घेर लिया।

चुरू के रतननगर में 24 जून 2017 की आधी रात को आनंदपाल का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया तो प्रदेश में जबरदस्त तनाव का माहौल बन गया। आनंदपाल का शव गांव सांवराद में रखा गया और लंबे समय तक आंदोलन चला फिर सरकार की निंद उड़ गई और परिवार के आगे झुक कर दाग संस्कार करवाया गया।

लेकिन श्रद्धांजलि सभा के दिन हजारों की भीड़ ने उपद्रव मचा दिया जिमें कई लोगों की मौत हो गई और सैंकड़ो लोग घायल हो गए। लोगों को पहली बार एहसास हुआ की एक गैंगस्टर की मौत पर आखिर इतना बवाल केसे हो गया लेकिन बताया जाता है कि इस हत्या के राजनीतिक कारण थे।

एनकाउंटर का कारण सियासी था और इसी वजह से गैंगस्टर बना आनंदपाल पुलिस की नजरों में अपराधी होने के बावजूद लोगों की नजरों में रोबिन हुड बन गया। 2017 में सांवराद में हुई श्रद्धांजलि सभा में हजारों की तादाद में लोग जूटे तो देश में हाहाकार मच गया कि ऐसा गैंगस्टर आज तक नहीं देखा जिसकी मौत पर लाखों लोग आंसू बहा रहे हैं।


जेल में उसके नाम से जेलर कांपता था तो बाहर आते ही उसके दुश्मन कांपते थे और दुनिया के लिए रोबिन हुड बन जाता था। उसके पास हथियारों के साथ ब्लैक रंग की गांड़ियों का काफिला था जिसे देखकर पुलिस भी हैरान हो जाती थी वह वह किसी गांड़ी में है।

आनंदपाल के एनकाउंटर को 5 साल हो गए है लेकिन आनंदपाल की बरसी पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय पर ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन होता है। उसके फैंस अपनी स्टाइल में अपने हीरों को याद करते हैं और बताया जाता है कि वह जेल में रहे या बाहर उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता था।