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क्राइम

फाइलों में दफ्न बॉबी केस, CBI ने हत्या को करार दिया सुसाइड

प्रकाशित: Oct 22, 2022 21:58रिपोर्ट: Navtej TV

जुर्म की इस दुनिया में कुछ मामले ऐसे आते हैं जो बेहद चौकाने वाले होते हैं, फिर लोग यह सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि हमारे देश में कानून नाम की कोई चीज़ हैं भी या नही? जब किसी मामले की जड़ें पुलिस के हाथ लग जाती हैं लेकिन सच पता होने के बाद बावजूद आरोपी मामले को रफा- दफा करने में लगा रहता हैं| ऐसा ही बेहद चौकंने वाला मामला हैं जो 39 साल पहले चर्चा का विषय बना जिसकी वजह से दल की सरकार पर संकट के पहाड़ टूट पड़ें| हम बात कर रहें हैं बिहार के बॉबी हत्याकांड की जिसका राज हमेशा दफ़न करके रखा गया, 11 मई 1983 यह वो दिन हैं जब बिहार की राजधानी पटना के लोग सुबह उठे तो अखबार के फ्रंट पेज पर लिखा हुआ था बॉबी की संदिग्ध हालात में मौत और लाश को कहीं छुपाया गया|यही नहीं हैरानी की बात तो जब सामने आई कि मौत के बारे में ना कोई एफआईआर लिखी गई थी, और ना ही किसी का कानूनी कार्रवाई में ज़िक्र किया गया था

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आपको बता दें कि बॉबी का असली नाम श्वेता निशा त्रिवेदी हैं निशा बिहार विधानसभा की तत्कालीन सभापति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सरोज दास के द्वारा गोद ली गयी बेटी थी. बेहद खूबसूरत होने के कारण उन्हें प्यार से बेबी कहते थे लेकिन राजकपूर की फिल्म बेबी हिट होने के बाद फैन्स उन्हें बॉबी कहने लगे, बॉबी की दूसरी शादी के बाद उन्हें 2 बच्चे हुए.एसएसपी कुणाल किशोर ने मामले की गंभीरता को समझने के लिए विधान परिषद की सभापति और बॉबी की मां राजेश्वरी सरोज दास से मिलने का वक्त मांगा और समय मिलते ही वो खुद सभापति से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे, उन्होंने बताया कि बॉबी की मौत8 मई 1983 को हुयी इसके बाद बॉबी के शरीर को कब्रिस्तान में दफना दिया गया क्योकि बॉबी ईसाई धर्म को मानती थी|


मौत की गुत्थी उलझती जा रहीं थी सुलझने का नाम नहीं ले रहीं थी पुलिस के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि आने वाली किस रिपोर्ट पर विश्वास किया जाये क्योकि हर रिपोर्ट में अलग -अलग सबूत हाथ आ रहे थे| एसएसपी ने शव को कब्रिस्तान से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, डॉक्टर्स ने बॉबी की सड़ी हुयी लाश का पोस्टमार्टम किया और पोस्टमार्टम के दौरान बेहद चौकाने वाला खुलासा हुआ कि बॉबी को मेलेथियन नाम का जहर दिया गया था, अब पुलिस यह जान चुकी थी कि बॉबी की मौत सामान्य नहीं बल्कि एक कत्ल हैं यह मामला फिर सीबीआई के पास गया, और आखिरकार सीबीआई ने बॉबी के कत्ल को खुदकुशी बताकर ये मामला हमेशा के लिए बंद कर दिया और यह घटना बंद फाइलों के बीच दफन होकर रह गयी|