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चुनाव 2023

16 साल से जेल की सलाखों के पीछे से हुकूमत कर रहा है ये बाहुबली विधायक, योगी सरकार भी..

प्रकाशित: Feb 15, 2022 17:09रिपोर्ट: Navtej TV

इन दिनों यूपी में विधानसभा चुनावों का दौर चल रहा है और दो चरणों का मतदान खत्म हो गया है। दो चरणों के मतदान प्रतिशत का आंकड़ा बीजेपी के पक्ष में होता नहीं दिख रहा है और इसका कारण कम मतदान है जो सत्ता पक्ष के खिलाफ होता है। कम मतदान प्रतिशत का फायदा विपक्ष यानी समाजवादी पार्टी को हो सकता है। इस बार सभी दलों ने टिकट देने में बड़ी सावधानी बरती है लेकिन इसके बाद कुछ सीटों को लेकर लोगों की चर्चा बनी हुई है। यूपी के चुनावी इतिहास में माफिया से जुड़े लोगों का दबदबा रहता है और इस बार भी ऐसा होता दिख रहा है।

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मऊ सदर विधानसभा से बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का दबदबा सालों से चला रहा है और अंसारी ने जेल की सलाखों की पीछे से अपनी हुकूमत चलायी है। अंसानी पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज है और साल 2005 से जेल में बंद हैं होने के बाद भी वह विधानसभा के 3 चुनाव जेल में रहते हुए जीते हैं।

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मुख्तार अंसारी का प्रभाव पूर्वांचल की विधानसभा सीटों पर ज्यादा दिखाई देता है लेकिन 2017 में योगी सरकार के बनने के बाद लगातार मुख्तार अंसारी और उनके समर्थक पर जमकर कार्यवाही हुई थी। अंसानी की हुकूमत खत्म करने के लिए उसकी करोड़ों की संपत्तियों को या तो ध्वस्त कर दिया या कुर्क कर लिया। लेकिन इसके बाद भी उसका प्रभाव कम होता नहीं दिख रहा है और इस बार वह चुनाव जीत जाता है तो बहुत बड़ी बात होगी। मऊ की सदर सीट से अंसारी अब 5 बार चुनाव जीते है और यह सीट उनका गढ़ मानी जाती है।


इस बार बाहुबली विधायक विजय मिश्रा, आजम खान, नाहिद हसन जैसे कई विधायक जेल की सलाखों के पीछे से चुनावी मैदान में अपनी किस्मत अजमा रहे है। चुनाव जीतने के लिए सभी ने पूरी ताकत झोक रखी है। चुनाव लड़ने वाले विधायक अपने मत का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे लेकिन चुनाव जीतने के लिए जेल की सलाखों की पीछे से रणनीति बना रहे हैं। कानूनी रूप से इस प्रकार की अपरधी को सामान्य प्रत्याशियों की तरह चुनाव लड़ने का अधिकार है लेकिन बंदी को मतदान और जनसंपर्क करने की अनुमति नहीं है।

अंसारी को किसी पार्टी के सहयोग की जरूरत नहीं है और वह निर्दलीय भी चुनाव लड़े तो उनकी जीत सुनिश्चित मानी जाती है। मुख्तार अंसारी को चहाने वालों की कमी नहीं है और इसी वजह से वह चुनाव जीत रहे है लेकिन इस बार उनकी हार को लेकर चर्चा तेज है।