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अजमेर संभाग

नागौर के तिलोकराम ने पेश की नई मिसाल, बच्चों की तरह करता है पेड़-पौधे की देखभाल

प्रकाशित: Jun 06, 2023 15:52रिपोर्ट: Navtej TV

नागौर जिले के संखवास पंचायत के देवनाडा तालाब के पास में एक प्रसिद्ध सती माता का मंदिर है उस मंदिर परिसर में पिछले 4 वर्षों में 500 से अधिक पौधे लगाए गए हैं जिनमें से 350 के लगभग पेङ पौधे पनपकर बड़े हो चुके हैं ... विशेष बात यह है कि इन पेड़-पोधो की पिछले श्रीमान तिलोकराम इनानिया अपने बच्चों की तरह देखभाल करते हैं समय-समय पर उन की निराई गुड़ाई करते हैं समय-समय पर उनको पानी पिलाना उनकी तारबंदी करना तथा अनावश्यक खरपतवार को नष्ट करना सहित अनेक सेवा कार्य करते हैं ..

विशेष बात यह है कि तिलोक राम जी इनानिया प्रतिदिन सुबह-सुबह जल्दी उठ कर मंदिर परिसर में लगाए गए पेड़ पौधों की देखभाल करते हैं .देवनगर रोड स्थित सती माता मंदिर परिसर के लगाए गए पेड़ पौधों में बरगद ,पीपल ,नीम ,मीठा नीम, अशोक ,सहजन, शीशम ,आंवला बेलपत्र अमलताश नींबू सहतूत अमरूद गुलर गूंदा पत्थरचट्ठा मोगरा चमेली रौहिङा ईमली कैरूंदा अश्वगंधा अङूसा ग्वारपाठा तूलसी मरवा सहित अनेक औषधि पौधे भी उगाए गए हैं ..

तिलोक राम इनानिया की मेहनत और लगन का अनेकों ग्राम वासियों ने आभार प्रकट किया तथा बताया कि पिछले 4 वर्षों में जिस प्रकार से तिलोक राम इनानिया ने अपने दैनिक जीवन के आवश्यक कार्यों को त्याग करके अपने घरेलू कार्यों को दरकिनार कर आज के इस चकाचौंध दुनिया का मौह छोड़ते हुए एक सरल सौम्य स्वभाव के साथ प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर मंदिर परिसर में आते हैं तथा आने के पश्चात माता रानी के दर्शन कर अपने कार्य में जुड़ जाते हैं और कार्य करने की शैली उनकी इस प्रकार से कि वह प्रत्येक पौधे को अपने बेटे बेटी की भांति सार संभाल करते हैं तथा उन पेड़ पौधों की निराई गुड़ाई करना उनके चारों तरफ बाङ बंदी तारबंदी करना बारिश के मौसम में जब उन गड्ढों के अंदर खरपतवार उग जाती है तो उस खरपतवार को नष्ट करते हैं तथा उनको गहरा गड्ढा खोदकर जमीन को मुलायम बनाते हैं

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ताकि पानी अंदर जङ तक जाते हुए उनके जड़ तक पहुंच सके तथा उनको इस प्रकार से पोषित और देखभाल करते हैं उनकी जगसराहना की जाए तो भी कम पड़ती है आज जिस प्रकार से दुनिया ऐश और आराम की जिंदगी जीते हुए पैसो के पीछे भागने का काम करती है उसके विपरीत तिलोकराम पिछले 4 वर्षों से सेवा में लगे हुए हैं इसके अलावा गांव में भी कहीं अन्यत्र पर्यावरण से संबंधित कुछ कार्य रहता है तो भी वह वहां पर पहुंच जाते हैं तथा उनकी हर संभव मदद करते हैं तिलोकराम ने बताया कि बताया कि मंदिर परिसर के अलावा भी कहीं पर भी पर्यावरण से संबंधित मेरी आवश्यकता पड़ेगी तो मैं सदैव ग्रामीणों को वहां अग्रिम पंक्ति में खड़ा मिलूंगा..