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चुनाव 2023

कृषि कानून वापसी के एलान के बाद विपक्ष को लगा बड़ा झटका, जल्द बढ़ेगा एनडीए का कुनबा

प्रकाशित: Nov 19, 2021 15:19रिपोर्ट: Navtej TV
पिछले एक साल से कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर जमकर ​हमला कर रहा था लेकिन पीएम मोदी ने एक झटके में कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करके ​पूरे विपक्ष को तड़गा झटका दिया है। विपक्ष कृषि कानूनों को लेकर सभी प्रकार के चुनावों में बीजेपी को किसान विरोधी बताकर वोट मांग रही थी लेकिन जैसे पीएम मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेने की बात कहीं तो विपक्ष के पास अब बीजेपी पर किसान विरोधी कहने का मौका नहीं रहेगा।

पंजाब
मोदी के इस फैसला का सबसे ज्यादा स्वागत पंजाब में उनके सबसे पूराने सहयोगी अकाली दल ने किया है और इस फैसले पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा को एक एतिहासिक क्षण बताया और उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव का यह पवित्र दिन किसानों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आया है।

शिरोमणि अकाल दल ने कृषि कानूनों के विरोध में सबसे पहले एनडीए से अलग होने का फैसला किया था इस बात को लेकर विपक्ष बीजेपी को धोखेबाज कहा था। शिरोमणि अकाली दल 22 साल तक एनडीए के साथ रहा था लेकिन इन बिलों के कारण वह अलग हुआ था। इस फैसले के बाद अब अकाली दल एनडीए में शामिल हो सकता है।

कांग्रेस के पूर्व सीएम अमंरिदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ने के बाद कहा था कि अगर बीजेपी किसानों के हित में फैसला करती है तो आने वाले चुनावों में वह उनके साथ गठबंधन करने में शंका नहीं करेगी। इस फैसले के बाद बीजेपी के साथ कैप्टन की नई पार्टी और अकाली दल एक होकर चुनाव लड़ती है तो इसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और सभी पार्टियां बीजेपी को किसान विरोधी बताकर चुनावी मैदान में उतर गयी थी। लेकिन पीएम मोदी के इस फैसले के बाद विपक्ष के पास अब कोई बड़ा चुनावी मुद्वा नहीं बचा है जो यूपी चुनावों में बीजेपी को घेर सकें। किसान आंदोलन के नेता भी बीजेपी को यूपी चुनावों में सबक सिखाने की बात कह रहे थें लेकिन अब उनके पास भी कोई जवाब नहीं बचा है। यूपी में ही सबसे ज्यादा किसानों ने आंदोलन किया है और राकेश टिकैत भी इसी प्रदेश से आते हैं।

हरियाणा
कृषि कानूनों को लेकर भी हरियाणा में बीजेपी सरकार का जबरदस्त तरीके से किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा था। ​इस आंदोलन में सबसे पहले हरियाणा के किसानों ने अपना समर्थन दिया था ​हरियाणा की खट्टर सरकार को इस फैसले के बाद थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। हरियाणा में भी जल्द चुनाव होंगे तो इसका असर चुनाव पर जरूर पड़ता लेकिन अब किसानों का साथ बीजेपी को मिल सकता है।