चौथे चरण के मतदान के बाद सपा का जोश सातवें आसमान पर तो बीजेपी की बत्ती हुई गुल
चौथे चरण के चुनाव के वोटिंग ट्रेंड को देखें तो पिछले चुनाव से एक फीसदी वोटिंग कम हुई है, लेकिन सिख और किसान बहुल सीटों पर जमकर मतदान हुए हैं. इस फेज में किसान आंदोलन का असर वाले तराई बेल्ट में सिख वोटर थे तो अवध के इलाके पासी निर्णायक है. सिख और किसान बहुल सीटों पर वोटिंग ज्यादा हई हैं जबकि शहरी क्षेत्रों में फीकी रही है।
चौथे फेज के चुनाव में किसको फायदा किसे नुकसान? इन पार्टियों में मची खलबली!
चौथे चरण में अवध के जिन इलाके में वोटिंग हुई है, वहां पर पासी वोटर काफी अहम माने जाते हैं. सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, फतेहपुर, लखनऊ के ग्रामीण इलाके वाली सीटों पर पासी वोटर निर्णायक भूमिका में है. ऐसे में पासी बहुल सीटों पर वोटिंग में इजाफा देखने को मिला है जबकि शहरी क्षेत्र में वोटिंग कम रही है. पिछली बार के चुनाव में पासी वोटर बीजेपी के साथ खड़े दिखे थे, जिसके दम पर विपक्ष का सफाया हो गया था. इस बार पासी वोटों के लिए बीजेपी, सपा, बसपा और कांग्रेस ने साधने के लिए तमाम जतन कर रखे थे.
चौथे चरण की जिन 59 सीटों पर चुनाव हुए हैं, उनके विश्वलेषण करने पर साफ पता चलता है कि वोटिंग फीसदी बढ़ने से विपक्ष को लाभ मिलता. बता दें कि चौथे चरण के लिए जिन इलाके में वोटिंग हुई है, वहां के सियासी समीकरण को देखें तो तराई बेल्ट के तहत आने वाले पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर में सिख, किसान और कुर्मी वोटर अहम है तो अवध के हरदोई, उन्नाव, सीतापुर, रायबरेली, लखनऊ में पासी समुदाय काफी महत्वपूर्ण है।

वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक बार फिर जीत को लेकर बड़ा दावा किया है. अखिलेश ने कहा कि सपा-गठबंधन सरकार को और भी सशक्त बनाने के लिए जनता वोट डालने के लिए उत्साहित है.अखिलेश यादव ने ट्विटर पर लिखा, ''चौथे चरण में ही सपा-गठबंधन की सरकार को साकार करनेवाली उप्र की जागरूक जनता का बहुत-बहुत धन्यवाद! अगले तीन चरणों में सपा-गठबंधन सरकार को और भी सशक्त बनाने के लिए जनता वोट डालने के लिए जिस तरह उत्साहित है, वैसा उत्साह अब से पहले कभी नहीं देखा गया है. सबको शुक्रिया!'' भाजपा खत्म।
वहीं राजधानी लखनऊ में 60 फीसदी वोटिंग रही, लखनऊ में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं. लखनऊ पश्चिम सीट पर मुस्लिम वोटर काफी महत्वपूर्ण हैं, जहां करीब 58 फीसदी वोटिंग हुई है. ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीता का दावा कर रहे हैं, पर देखना है कि 10 मार्च के क्या नतीजे रहते हैं।





