पहले चरण का मतदान बीजेपी के लिए खतरे की घंटी, सपा की लगी लॉटरी!
5 राज्यों में 7 चरणों में होने वाले चुनावों के पहले चरण का मतदान हो चुका है। पहले चरण में यूपी विधानसभा की 58 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ है। पश्चिमी यूपी में हुए मतदान का प्रतिशत अब लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि इन सभी सिटों पर बीजेपी ने 2017 में बाजी मारी थी लेकिन इस बार किसान आंदोलन के कारण उनकी सीट कम होने का दावा किया जा रहा है।
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पश्चिमी यूपी में जाट वोटरों का दबदबा है और इसी वजह से इस बार सपा ने जयंन्त के साथ गठंबधन किया है जो इस बार यूपी में बड़ा बदलाव ला सकता है। पहले चरण में हुए कम मतदान को लेकर चुनवी विशेषज्ञों ने अपनी राय देना शुरू कर दिया है और इसे बीजेपी के लिए खतरे की घंटी करार देते है सपा की वापसी का ऐलान कर दिया है।
यह बात किसी से छूपी नहीं है कि जब भी मतदान प्रतिशत कम होता है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान मौजूदा सरकार को होता है और इसका फायदा विपक्ष की बड़ी पार्टी को मिलता है। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में 11 जिलों की 58 सीटों पर 60 फीसदी मतदान हुआ है।
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75 प्रतिशत सबसे ज्यादा मतदान कैराना में और सबसे कम 45 प्रतिशत साहिबाबाद में हुआ है लेकिन 2017 के मुकाबले में इन सीटों पर 2 फीसदी मतदान कम हुआ है जो मौजूदा सरकार के खिलाफ होती है। एंटी इनकंबेंसी को पता इसी बात से चलता है कि लोगों को मौजूदा सरकार के पक्ष में मतदान करने का ज्यादा उत्साह नहीं है।

58 सीटों पर मतदान हुआ है वह उनमें से 53 सीटें बीजेपी के खाते में थी और योगी सरकार के 9 मंत्री भी इन सीटों से अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। आने वाले 6 चरणों में अगर मतदान प्रतिशत इसी तहर कम होता रहा तो यह बीजेपी के लिए खतरे की घंटी होने के साथ सत्ता परिवर्तन का संदेश होगा।
इस बार यूपी में बीजेपी और सपा में ही कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है लेकिन 10 मार्च का परिणाम तय करेगा कि जनता ने किसे चुना है। कम मतदान होने के कई कारण होते है लेकिन लोगों को अपने मत का अच्छी सरकार चुनने के लिए करना चाहिए क्योंकि ऐसा मौका 5 साल में एक बार ही मिलता है।





