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चुनाव 2023

पहले चरण में जाट करेंगे ठाठ या करेंगे खड़ी खाट, यूपी में दिखेगा जाटों का जलवा

प्रकाशित: Jan 28, 2022 22:13रिपोर्ट: Navtej TV

यूपी में चुनावों से पहले सभी दल जाट वोटों पर अपनी पकड़ बनाने के लिए कई प्रकार के दावे कर रही है लेकिन इस बात का फैसला तो पहले चरण के मतदान के बाद ही तय हो जाएगा। यूपी में इस बार यह कहावत तेजी से चर्चा का विषय बनीं हुई है कि जाट अबकि बार किस पार्टी किसकी करेंगे खाट खड़ी और किसके करेंगे ठाठ।

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान जाट बाहुल्य क्षेत्र से होगी और इसी वजह से जाट वोटरों पर सभी पार्टियां अपने दाव चल रही है। जाट समुदाय के नेता माने जाने वाले आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी इस बार सपा के साथ चुनावी मैदान में उतरे है और जाट वोटरों के भरोसे अपना भविष्य दाव पर लगा दिया है।

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके में 17 फीसदी वोट बैंक के कारण विधानसभा की 120 सीटों पर सीधा असर डालते है और इसी वजह से जाट वोट बैंक निर्णायक माना जा रहा है। वहीं 2 दर्जन से ज्यादा सीटों पर जाट वोटर्स को निर्णायक माना जाता है। बीजेपी ने पश्चिमी यूपी की एक दर्जन से ज्यादा सीटों पर जाट प्रत्याशी उतारे हैं तो आरएलडी ने 9 जाट और सपा ने तीन जाट उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।


चौधरी चरण सिंह को जाट समुदाय का बड़ा नेता माना जाता था और एक समय था जब चौधरी चरण सिंह और किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के बिना राज्य या केंद्र में सरकार बन पाना मुश्किल हो गया था। चौधरी चरण सिंह के बेटे चौधरी अजित सिंह का जाट समाज में इतना प्रभाव नहीं रहा और इसी वजह जयंत चौधरी को हार का सामना करना पड़ा था।

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बीजेपी ने जाट समुदाय के बीच अपना आधार मजबूत किया है और इस तबके के बड़े नेता संजीव बलियान को केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री तो भूपेंद्र सिंह को योगी कैबिनेट में जगह देकर जाटों को अपने पक्ष में रखने का काम किया है। किसान आंदोलन के कारण जयंत चौधरी ने जाट समुदाय के बीच अपनी मजबूत पकड़ मजबूत बनाने का प्रयास किया है।


इसी वजह से वह सपा के साथ मिलकर जाट वोटों के सहारे कुछ नया करने का प्रयास कर रहे है। अब यह देखना होगा कि पहले चरण में जाट वोट किस पार्टी के ठाठ करते है और किसी पार्टी के खाट खड़ी करते हैं।