बागेश्वर धाम को टक्कर दे रहा है ये नया बाबा, जानें इसकी पूरी जन्म कुंडली
इन दिनों बागेश्वर धाम और करौली बाबा को लेकर सोशल मीडिया पर कई प्रकार की चर्चा हो रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर के संतोष सिंह भदौरिया उर्फ करौली बाबा ने तो महज कुछ ही सालों में करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर दिया। ये नए बाबा भी मारपीट के आरोपों के कारण चर्चा में आए है और उनके भक्त ने ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है।
इस मामले को लेकर करौली बाबा ने अपनी सफाई दी है लेकिन इसके बाद भी उनके खिलाफ कार्यवाही की मांग उठ रही है। आज हम आपको संतोष सिंह भदौरिया उर्फ करौली बाबा की पूरी जन्म कुंडली के बारे में खुलासा कर रहे है जिसके बारे में उनके भक्तों को भी नहीं पता।
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उन्नाव के बारह सगवर के रहने वाले संतोष सिंह भदौरिया पहले किसान थे लेकिन किस्मत ने उनको रातों रात ही बाबा बना दिया। जब पूरा देश किसान आंदोलन की चपेट में था तो उस समय बाबा भी उसमें शामिल थे। महेंद्र सिंह टिकैत ने संतोष सिंह भदौरिया को कानपुर के सरसोल क्षेत्र में आंदोलन करने की पूरी बागडोर सौंप दी थी और यही से शुरू हो गई करौली बाबा की कहानी।
किसान नेता भदौरिया ने पुलिस कस्टडी से किसानों को छुडा दिया तो पुलिस ने उनकी जमकर धुनाई कर दी। इस घटना के बाद वह किसानों की हिरो बन गए और किस्मत भी बदल गई। उस समय पूर्व केंद्रीय मंत्री जायसवाल से उनकी नजदीकियां बढ़ी और कोयला निगम का चेयरमैन का पद मिलते ही लाल बत्ती मिली। इसका कांग्रेस के नेताओं ने विरोध किया तो उनका पद से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने करौली में जमीन खरीदी और शनि देव का मंदिर बनवाया।
करौली आश्रम में आयुर्वेदिक हॉस्पिटल शुरू किया और जड़ी-बूटी से इलाज करने का दावा किया। इसके बाद भदौरिया का तंत्र-मंत्र से लोगों को इलाज करने की खबर ने सबको हैरान कर दिया। इसके बाद उनके इलाज से ठीक होने वाले लोग उनको करौली सरकार कहने लगे और लोकप्रियता इतनी तेजी से फैलने लगी दूर—दूर से लोग इलाज करवाने आने लगे।
बाबा ने अपना प्रचार यू-ट्यूब के जरिए शुरू किया और इसके बाद पैसों की बारिश होनी शुरू हो गई। प्रतिदिन 4 से 5 हजार लोग आने शुरू हो गए। इलाज के नाम पर पहले 100 रुपये की रसीद कटी जाती है इसके बाद हवन के नाम पर हजारों रुपये का खर्चा आता है।
हवन के नाम पर तो अब लाखों रुपये की रसीद काटी जाती है। बागेश्वर धाम की तरह यहां भी लोग अपनी मनोकामना की अर्जी लगाते हैं लेकिन यहां अर्जी लगाने के नाम पर रसीद काटी जाती है और बागेश्वन धाम में ऐसा नहीं होता। पैसों का हिसाब करौली बाबा के दो बेटे लव-कुश रखते है। बाबा करौली का इतना प्रभाव हो चुका है कि आश्रम में बड़े-बड़े अधिकारी और राजनेता तक आते है।
आश्रम में मारपीट की घटना पहले भी हो चुकी है लेकिन बाबा का कहना है कि आश्रम को बदनाम करने के लिए ऐसी कहानी रची जाती है। इलाज के नाम पर बाबा ने करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया है। भारत में धर्म के नाम पर ऐसे बाबा लोगों की भावना के साथ खेलते है लेकिन जब पुलिस जांच से पता चलेगा की बाबा सही या उनका भक्त।





