इस फॉर्मूले से किया जाएगा गहलोत मंत्रिमंडल का विस्तार
उपचुनावों के नतीजों के बाद गहलोत मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर जो कयास लगाये जा रहे हैं जल्द सही होने वाले हैं। खबरों के अनुसार बताया जा रहा है मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लगभग सभी बातों का ध्यान रखा गया है और इस बार मंत्रियों की संख्या पहले के मुकाबले ज्यादा हो सकती है। इस बार कई नये चेहरे को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है तो पायलट गुट के विधायको को भी मौका दिया जाएगा। दिल्ली आलाकमान की तरफ से हरी झंडी मिल चुकी है और गहलोत जल्द दिल्ली जाकर प्रियंका से मुलाकत करके नये मंत्रिमडंल के बारे में बता सकते हैं।
आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस बार सभी वर्गो का ध्यान रखा जाएगा जिसमें जाट, ब्राह्मण, SC,ST के साथ माइनोरिटी पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। कांग्रेस इस बार सत्ता परिवर्तन की परम्परा को खत्म करके सत्ता में वापसी करने की तैयारी में है। अगर इस नये मंत्रिमंडल के बाद पायलट—गहलोत की गुटबाजी कम होती है तो कांग्रेस आलाकमान को थोड़ी राहत मिल सकती है। उपचुनावों के नतीजों के परिणाम का श्रेय सीएम गहलोत को दिया जा रहा है तो कुछ नेता इसे संगठन की जीत बता रहे हैं।
सीएम गहलोत को मंत्रिमंडल फेरबदल के लिए फ्री हैंड कर दिया गया है लेकिन नये मंत्रिमंडल में पायलट गुट के साथ निर्दलीय और बीएसपी छोड़कर आये विधायकों को भी मौका दिया जा सकता है। फिलहाल नये मंत्रिमंडल बदलाव की बात पीछले एक साल से चल रही है लेकिन अभी तक यह न्यूज चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां ही बनकर रह रही है। इस बार कई मौजूदा मंत्रियों को बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है तो कई मंत्रियों को दोहरी जिम्मेदारी से भी मुक्त किया जा सकता है।
आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस बार सभी वर्गो का ध्यान रखा जाएगा जिसमें जाट, ब्राह्मण, SC,ST के साथ माइनोरिटी पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। कांग्रेस इस बार सत्ता परिवर्तन की परम्परा को खत्म करके सत्ता में वापसी करने की तैयारी में है। अगर इस नये मंत्रिमंडल के बाद पायलट—गहलोत की गुटबाजी कम होती है तो कांग्रेस आलाकमान को थोड़ी राहत मिल सकती है। उपचुनावों के नतीजों के परिणाम का श्रेय सीएम गहलोत को दिया जा रहा है तो कुछ नेता इसे संगठन की जीत बता रहे हैं।

सीएम गहलोत को मंत्रिमंडल फेरबदल के लिए फ्री हैंड कर दिया गया है लेकिन नये मंत्रिमंडल में पायलट गुट के साथ निर्दलीय और बीएसपी छोड़कर आये विधायकों को भी मौका दिया जा सकता है। फिलहाल नये मंत्रिमंडल बदलाव की बात पीछले एक साल से चल रही है लेकिन अभी तक यह न्यूज चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां ही बनकर रह रही है। इस बार कई मौजूदा मंत्रियों को बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है तो कई मंत्रियों को दोहरी जिम्मेदारी से भी मुक्त किया जा सकता है।





