स्वरा भास्कर के 'पद्मावत' जौहर बयान पर गरमाई सियासत: मौलाना साजिद रशीदी से लेकर शाजिया इल्मी तक आमने-सामने
अभिनेत्री स्वरा भास्कर द्वारा 31 अगस्त को 'पद्मावत' फिल्म के जौहर दृश्य पर दिए गए बयान को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां कुछ नेताओं ने उनके तर्कों का समर्थन किया है, वहीं भाजपा नेताओं और धार्मिक गुरुओं ने इसकी कड़ी आलोचना की है।
मुख्य बातें
- स्वरा भास्कर ने 31 अगस्त को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान पद्मावत के जौहर दृश्य पर टिप्पणी की थी।
- मौलाना साजिद रशीदी ने फिल्म की ऐतिहासिक प्रमाणिकता और उसके संदेश पर सवाल उठाए।
- पूर्व सांसद मजीद मेमन ने स्वरा के बयान का बचाव करते हुए उसे कानूनी और सामाजिक संदर्भ से जोड़ा।
- भाजपा नेताओं गोपाल शर्मा और शाजिया इल्मी ने अभिनेत्री के बयान को परंपराओं की नासमझी बताया।
'पद्मावत' फिल्म और जौहर प्रथा को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर की टिप्पणी पर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस छिड़ गई है। 31 अगस्त को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयान के बाद से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। जहां कुछ नेताओं ने उनके तर्कों का समर्थन किया है, वहीं विपक्षी खेमे और भाजपा नेताओं ने इसे परंपराओं और इतिहास की समझ से परे बताया है।
31 अगस्त के कार्यक्रम से बढ़ा विवाद
यह पूरा विवाद 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 'वुमन लाइफ फ्रीडम टॉक' कार्यक्रम से शुरू हुआ। इस दौरान अभिनेत्री से साल 2018 में फिल्म 'पद्मावत' को लेकर लिखे गए उनके एक खुले खत के बारे में सवाल पूछा गया था।
स्वरा भास्कर ने जवाब देते हुए कहा था कि जब वह फिल्म में जौहर का दृश्य देखती हैं, तो उनके मन में यह सवाल आता है कि यह समाज को क्या संदेश दे रहा है। उनके इस बयान का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद अभिनेत्री ने वीडियो जारी कर स्पष्टीकरण भी दिया था कि उनके कहने का यह अर्थ नहीं था।
मौलाना साजिद रशीदी और मजीद मेमन के तर्क
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिल्म 'पद्मावत' की कहानी मलिक मोहम्मद जायसी ने कई सदियों बाद लिखी थी। इतने लंबे अंतराल के बाद लिखी गई घटनाओं में बदलाव संभव है।
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा- "अगर कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति का सामना करता है, तो उसे राजपूतों की बहादुरी से जोड़ना सवाल खड़े करता है। फिल्म के जरिए समाज में यह संदेश दिया गया कि दुष्कर्म के बाद जिंदा रहने वाली महिला बुजदिल है, जो बेहद दुखद है।"
वहीं, पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मजीद मेमन ने स्वरा भास्कर के पक्ष में बात रखते हुए कहा कि वह एक एक्टिविस्ट के रूप में इतिहास के संदर्भों पर बात कर रही थीं। मजीद मेमन ने कहा- "स्वरा के बयान का मतलब यह था कि गंभीर अपराध के बाद पीड़ित व्यक्ति को कानून के दायरे में रहते हुए लड़ना चाहिए, न कि जीवन समाप्त करने को बहादुरी मानना चाहिए।"
कांग्रेस और बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने इस विवाद पर कहा कि समाज समय के साथ बदलता है और पुरानी कुप्रथाओं को पीछे छोड़ा जाता है। तारिक अनवर ने कहा- "पुराने समय में कई ऐसी बातें थीं जिन्हें समाज स्वीकार करता था, लेकिन आज का संविधान और समाज अधिकारों की बात करता है। इतिहास को उसके दौर और आज के नजरिए से अलग-अलग समझने की जरूरत है।"
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। जयपुर में भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने स्वरा भास्कर पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे लोगों को देश की परंपराओं और भावनाओं की समझ नहीं है।
भाजपा नेत्री शाजिया इल्मी ने भी आलोचना करते हुए कहा कि कम जानकारी खतरनाक होती है और इस तरह के बयानों से इतिहास की समझ पर सवाल खड़े होते हैं। वहीं, जयपुर में फाइनेंस कमीशन के चेयरमैन अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि वीरांगनाओं के समय की परिस्थितियां और आज का समाज अलग हैं, इसलिए इतिहास की घटनाओं को आज के पैमाने पर सीधे तौर पर परखना सही नहीं होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्वरा भास्कर के किस बयान पर विवाद हुआ है?
स्वरा भास्कर ने 31 अगस्त को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान फिल्म 'पद्मावत' में दिखाए गए जौहर के दृश्य और उसके सामाजिक संदेश को लेकर बयान दिया था, जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ।
मौलाना साजिद रशीदी ने इस विवाद पर क्या कहा?
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि 'पद्मावत' की कहानी मलिक मोहम्मद जायसी ने सदियों बाद लिखी थी और ऐसी घटनाओं को सीधे तौर पर राजपूतों की बहादुरी से जोड़ना सही नहीं है।
मजीद मेमन ने स्वरा भास्कर के बयान का क्या अर्थ बताया?
पूर्व सांसद मजीद मेमन ने कहा कि स्वरा के बयान का अर्थ यह था कि किसी गंभीर अपराध के बाद पीड़ित व्यक्ति को हार मानने के बजाय कानून के दायरे में रहकर मुकाबला करना चाहिए।
भाजपा नेताओं ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
भाजपा विधायक गोपाल शर्मा और नेत्री शाजिया इल्मी ने स्वरा भास्कर के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें देश की परंपराओं और इतिहास की सही समझ नहीं है।




