वित्त मंत्री नहीं होने के कारण प्रधानमंत्रियों ने पेश किया बजट, जानें इसका पूरा सच
आजादी के बाद हमने संसदीय व्यवस्था को चुना था जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सांसद शामिल होते है। हर साल केंद्र सरकार आम बजट पेश करती है और इसमें पूरे देश के लोगों का ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। इस काम को करने में वित्त मंत्री की बढ़ी जिम्मेदारी होती है लेकिन कई बार ऐसा भी हुआ है कि वित्त मंत्री ने नहीं होने के कारण प्रधानमंत्री को बजट पेश करना पड़ा है।
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1. साल 1958-59 में टीटी कृष्णामाचारी वित्त मंत्री थे लेकिन घोटाले के कारण उनको इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लोकसभा में बजट पेश किया। इस बजट में वह बाते देखने को मिली जो हर भारतीय के लिए बहुत जरूरी थी।
2. साल 1970 में इंदिरा गांधी के समय मोरारजी देसाई के पास वित्त मंत्रालय था। लेकिन पार्टी में कई प्रकार तनातनी चल रही थी और मोरारजी को पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद इंदिरा गांधी ने वित्त मंत्रालय संभाला और बजट पेश किया।
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3. 1984 में राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए बजट पेश किया। उस समय वित्त मंत्री वीपी सिंह का राजीव से विवाद होने पर इस्तीफा दे दिया। इसके बाद राजीव ने वित्त मंत्रालय अपने पास रखते हुए आम बजट पेश किया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2022-23 के लिए आम बजट पेश करने जा रही हैं। यह मोदी सरकार का 10वां और दूसरे कार्यकाल का चौथा बजट पेश होगा। इस बजट से बहुत ज्यादा उम्मीद लगायी जा रही है।





