राजस्थान में पीएम मोदी के नाम पर लड़ा जाएगा विधानसभा चुनाव
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने पर बीजेपी ने एक महीने के महाजनसंपर्क अभियान के श्रीगणेश का जो प्रस्ताव पीएम मोदी को भेजा था उसमें मोदी की रैली हैदराबाद में करवाने का प्रस्ताव दिया गया था.पीएम मोदी ने इसे बदलकर राजस्थान के अजमेर में रखने को कहा.इसके पीछे पीएम मोदी का मकसद साफ था कि राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी का चेहरा खुद होंगे और अशोक गहलोत से सीधे दो दो हाथ करेंगे.पिछले आठ महीने में जिस तरह से पीएम मोदी ने ताबड़तोड़ पांच रैलियां राजस्थान में की है.वैसे ही अपनी सरकार के नौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में छठी रैली अजमेर में करके.राजस्थान की चुनावी कमान अपने हाथ में ले ली..अजमेर में रैली कर पीएम मोदी ने बता दिया कि 2023 के अंत में होने वाले 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव हों या 2024 के लोकसभा चुनाव जिन्हें मोदी किसी भी हाल में हारना नहीं चाहते हैं..राजस्थान में जीत पीएम मोदी की 2024 में वापसी में महत्त्वपूर्ण साबित हो सकती है.वहीं राजस्थान में बीजेपी की हार मोदी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है
पीएम मोदी के राजस्थान दौरे की शुरुआत बीते साल सितंबर को हुई थी.जब पीएम मोदी ने सिरोही जिले के आबू रोड में सभा को संबोधित करने का प्रोग्राम बनाया था.हालांकि अपेक्षा से बहुत कम लोग जुटने के कारण मोदी रात दस बजे के बाद ही सभास्थल पहुंचे और वहां उपस्थित लोगों से लाउडस्पीकर उपयोग की समय सीमा समाप्त हो जाने के कारण भाषण नहीं दे पाने के लिए माफी मांग ली.इस सभा से उन्होंने दक्षिणी राजस्थान के सिरोही, जालोर और पाली सहित आसपास के जिलों की 26 सीटों को साधने का प्रयास किया था.दक्षिण राजस्थान का यह इलाका भाजपा के लिए सबसे मजबूत माना जाता है.यहां की 26 में से पिछली बार भाजपा ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी
दूसरी बार पीएम मोदी ने नवंबर में बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम में सभा कर आसपास की 19 सीटों पर निशाना साधा था..तीसरी बार प्रधानमंत्री मोदी ने जनवरी को भीलवाड़ा में गुर्जर समाज के आराध्य देव देवनारायण भगवान की जयंती समारोह में शामिल होकर भीलवाड़ा के आसींद में सभा करके गुर्जर समाज को साधने की भरपूर कोशिश की थी.अगर आठ महीने में मोदी के राजस्थान दौरों का आकलन किया जाए तो वे लगभग 100 विधानसभा सीटों को कवर कर चुके हैं.मोदी का अब तक का दौरा जाति-समाजों को साधने के मकसद से ही हुआ है..उनका फोकस आदिवासी, ओबीसी, गुर्जर - मीणा और एससी समुदाय रहा है.कर्नाटक चुनाव में भाजपा की शर्मनाक हार के बाद प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान में हर हाल में सरकार बनाने की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं
भाजपा संगठन राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी की सभाएं राजस्थान के हर जिले में करवाने पर विचार कर रहा है..संभवत: भाजपा देश में ऐसा पहली बार प्रयोग करने जा रही है जब किसी राज्य के चुनाव में पीएम मोदी जिले स्तर पर जनसभाएं करेंगे..हालांकि गुटबाजी में फंसी प्रदेश भाजपा मोदी की अब तक की 6 रैलियों में अपेक्षा अनुरूप भीड़ जुटाने में बार बार विफल रही है..इसलिए राजस्थान को लेकर भाजपा की रणनीति साफ है कि राजस्थान के चुनाव में मोदी ही भाजपा का चेहरा होंगे.बाकी गुटों में बंटे नेता मोहरे तो हो सकते हैं लेकिन मुख्य चेहरा नहीं होंगे नहीं.बीजेपी का आंकलन है की पीएम मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने पर गुटों में बंटे बीजेपी नेताओं को एकजुट करने में आसानी होगी.
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पीएम मोदी की नजर राजस्थान विधानसभा चुनाव के कुछ माह बाद होने वाले लोकसभा चुनावों पर भी है.पिछले दो लोकसभा चुनावों में बीजेपी एवं सहयोगी दल ने राजस्थान की 25 में से 25 लोकसभा सीटें जीती थी.मोदी राजस्थान विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने के साथ ही साथ उसके तुरंत बाद होने वाले 2024के लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर जीत दर्ज करना चाहते हैं दरअसल, राजस्थान को लेकर प्रधानमंत्री मोदी इतने गंभीर क्यों है? इसका मुख्य वजह यह है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में राजस्थान के 33 जिलों में से 7 जिलों में भाजपा का खाता भी नहीं खुला था.
वैसे वसुंधरा राजे के नेतृत्व में ही लड़े गए 2013 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 200 में से 13 सीटें जीतकर रिकॉर्ड कायम किया था.लेकिन 2018 में मोदी और वसुंधरा के बीच बढ़े तल्खी के वजह से चुनावों में बीजेपी और संघ के कार्यकर्ताओं ने ही "मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं" के नारे लगाकर बीजेपी को सत्ता से ही बाहर कर दिया..2018 में मोदी और अमित शाह के प्रचार अभियान से भी स्पष्ट हो गया था की राजस्थान जीतने में मोदी-शाह को विशेष रूचि ही नहीं है..इसके अलावा 60 से भी अधिक सीटों पर बीजेपी केकार्यकर्ता ही निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे और बीजेपी प्रत्याशियों के वोट काटकर कांग्रेस उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया और संगठन की ओर से ऐसे निर्दलीय उम्मीदवारों को बिठाने के कोईप्रयास भी नहीं किए गए.इसके बावजूद 2018 में भाजपा को मिले कुल वोट और कांग्रेस को मिलेकुल वोट में मात्र आधा प्रतिशत का ही फर्क रहा.
आत्मघाती मानसिकता के साथ आधे अधूरे मन से लड़े गए 2018 के चुनावों में भाजपा का खाता जिन जिलों में नहीं खुला था उनमें सीकर, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा, प्रतापगढ़ और जैसलमेर शामिल थे..इनमें से 4 जिले पूर्वी राजस्थान के हैं.इसके अलावा 4 जिले ऐसे हैं, जहां बीजेपी 70 से 80 प्रतिशत तक सीटें हार गई थी..इनमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत का गृह जिला जोधपुर भी शामिल है। यहां बीजेपी को 10 में से मात्र 2 सीटें ही मिली थी..बाकी 8 सीटों पर बीजेपी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा
वहीं, नागौर जिले में भी बीजेपी का बुरा हाल रहा..नागौर में बीजेपी 10 में से केवल 2 सीटें ही जीत पाई थी..अलवर जिले की 11 में से भी 9 सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा..अलवर से बीजेपी के केवल दो विधायक हैं। नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ के गृह जिले चुरू में भी पिछले विधानसभा चुनावों में बीजेपी 6 में से 2 सीटें ही जीत पाई थी। इसके अलावा जयपुर जिले की 19 में से 6 सीटें ही बीजेपी के खाते में गई थी.दरअसल राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खिंची तलवारों से राजस्थान कांग्रेस में आए संकट को मोदी एक अवसर के रूप में देख रहे हैं….
इसलिए राजस्थान में हुई रैलियों में अशोक गहलोत सरकार में हुए भ्रष्टाचार और आपस की लड़ाई में जनता के हो रहे बुरे हाल का जिक्र कर रहे हैं……कर्नाटक चुनाव को राष्ट्रीय मुद्दों पर बनाकर हार चुकी बीजेपी अब राजस्थान में स्थानीय मुद्दों को आगे कर कांग्रेस कोपटखनी देने की रणनीति बना रही है..इसी वजह से राजस्थान में कांग्रेस की सत्ता के खिलाफ माहौल बनाने के साथ पूरे कैंपेन को स्थानीय मुद्दों पर फोकस करने की रणनीति पर काम कर रही है..लेकिन मोदी के लिए चुनौती यही है कि वे स्थानीय मुद्दों पर सीएम गहलोत को कितना घेर पाते हैं?बीजेपी आस लगाए बैठी है कि मोदी के करिश्मे के कारण राजस्थान में भाजपा की सरकार बनेगी..बीजेपी के पक्ष में एक और तर्क दिया जा रहा है कि 1998 के बाद से राजस्थान में कोई भी सरकार दूसरी बार रिपीट नहीं हुई है..ऐसे में भाजपा की सत्ता में वापसी की उम्मीदें बढ़ी हुई है.वहीं अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस भी जनकल्याणकारी योजनाओं और वादों के दम पर सत्ता में बरकरार रहने की हर संभव कोशिश कर रही है..राजस्थान में सत्ता बदलती है या सत्ता बदलने का रिवाज, इसे देखने के लिए नवबंर या दिसंबर तक इंतजार करना होगा जब राजस्थान में विधानसभा चुनाव होंगे





