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बाबू नाम सुनते ही आतंकियों की होती थी पेंट गीली, जानें इस जाबाज सैनिक की दास्तां

प्रकाशित: Jan 26, 2022 13:26रिपोर्ट: Navtej TV

दुनिया के कई देशों ने भारतीय सेना का लौहा माना है और आजादी से पहले भी भारतीय सेना ने कई मौकों पर अपना जलवा दिखाया है। आज हम आपको एक ऐसे जाबाज योद्वा की कहानी बताने जा रहे है जो आतंकियों का काल बनकर उनको मौत के घाट उतारने में अपनी अलग ही पहचान बना ली थी। कहा जाता है कि इस जवान का नाम लेते ही आतंकियों की पेंट तक गीली हो जाती थी।

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जी हां इस जाबाज का योद्वा का नाम बाबू राम है जो जम्मू-कश्मीर पुलिस में एएसआई के पद पर कार्यरत थे। इस जवान ने देश के लिए अपने प्राण त्याग दिए और आतंकवादियों का सफाया करते हुए एक ऑपरेशन के दौरान 29 अगस्त 2020 को शहीद हो गए। गणतंत्र दिवस के मौके पर इस शहीद को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है।

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बाबू राम का जन्म 15 मई 1972 को जम्मू के पुंछ जिले के धारना गांव में हुआ था और इसके बाद देश की सेवा करने के लिए 1999 में जम्मू-कश्मीर पुलिस में बतौर कॉन्स्टेबल पद पर तैनात हुए। इसके बाद इस जाबाज को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप में शामिल किया गया और इसके बाद उन्होंने कई बड़े ऑपरेशन में आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में वीरता और बहादुरी से लड़ने के कारण प्रमोशन मिलता रहा।

एएसआई बाबू राम ने लगभग एक दर्जन से ज्यादा एनकाउंटर का हिस्सा रहे और इसमें 2 दर्जन से अधिक आंतकियों को ठिकाने लगाया था। इसी वजह से आतंकियों में बाबू नाम का खौफ पैदा हो गया था। 29 अगस्त 2020 को आतंकियों ने पुलिस और सीआरपीएफ की नाका पार्टी पर हमला कर किया और उसके बाद एक घर में जाकर छूप गए।

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लेकिन बाबू राम ने उन आतंकियों का पीछा नहीं छोड़ा और घर में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया। इस दौरान आतंकियों की गोली का शिकार होने के बाद भी लश्कर कमांडर साकिब बशीर को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद बाबू राम को अस्पताल ले जाया गया लेकिन वह बच नहीं सके। इस दिन बाबू राम आतंकियों से नहीं लड़ेत तो भारत में बड़ा हमला भी हो सकता था जिसमें कई लोगों की जान भी जा सकती थी।