चौकीदार चोर के नारे के पीछे राहुल गांधी ने रची थी बड़ी साजिशः आजाद
50 सालों तक गांधी परिवार के वफादार रहने के बाद कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने वाले गुलाम नबी आजाद ने जब से कांग्रेस से किनारा किया है, लगातार वो कांग्रेस और राहुल गांधी को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे है। अब उन्होनें एक नया बयान दिया है जो ना सिर्फ राहुल गांधी की पार्टी में मनमानी को दर्शाता है बल्कि इससे कहीं ना कहीं ये भी जाहिर होता है कि पार्टी के नेताओं को ना चाहते हुए राहुल गांधी की बात माननी पड़ती है, आपकों याद हो तो 2019 के लोकसभा चुनाव के समय पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी के आदेश पर ष्चौकीदार चोर है अभियान चलाया था।
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राहुल गांधी ने कांग्रेस के सभी बड़े नेताओ से चौकीदार अभियान को समर्थन देने के लिए कहा था। आजाद ने कहा कि राहुल गांधी ने एक बैठक के दौरान उन लोगों से हाथ उठाने के लिए कहा, जिन्होंने कभी चुनाव प्रचार के दौरान उनके नारे का इस्तेमाल किया। उस समय मनमोहन सिंह, एके एंटनी, पी चिदंबरम और आजाद जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
गुलाम नबी आजाद ने आगे बताया कि राहुल ने चौकीदार चोर है कहने वाले हर किसी से हाथ उठाने के लिए कहा तो मैं अपनी कुर्सी पर धंस गया था। इतने वरिष्ठ लोग जो मुख्यमंत्री रहे हैंए इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव के साथ मंत्री रहे हैं। आप उनसे कैसे उम्मीद करते हैं सार्वजनिक रूप से यह भाषा बोलें, गुलाम नबी ने कहा कि ये भी मेरा एक इस्तीफा देने का कारण है।

वहीं आजाद ने इंदिरा गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि हमें अपनी राजनीति की शिक्षा इंदिरा गांधी से मिली है जब मैं युवा नेता था। इंदिरा गांधी ने मुझे बुलाया और कहा कि हमें अटल बिहारी बाजपेयी से लगातार मिलते रहना चाहिए यही है एक नेता और नेता का अंतर है हमें विपक्ष के नेताओं को सम्मान देने की सीख मिली है हमें कभी नहीं सिखाया गया कि हम जनता के सामने पीएम चोर है जैसे नारे बोलें।
गुलाम नबी आजाद ने हाल ही पार्टी से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अपने 5 पेज के इस्तीफे में आजाद ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है, इस्तीफे में उन्होंने कहा था कि पार्टी रिमोट कंट्रोल मॉडल पर चल रही है ऐसे में अगला पार्टी अध्यक्ष भी कठपुतली ही होगा।





