ज्ञानवापी में शिवलिंग के बाद अब मिली हनुमान जी की विशाल प्रतिमा, कल होगा बड़ा फैसल
ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले पर वाराणसी की जिला कोर्ट में आज भी सुनवाई हुई, सुप्रीम कोर्ट ने अदालत को 8 सप्ताह में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे होने के बाद से नित नए खुलासे हो रहे है। पहले कहा गया कि कुएं से शिवलिंग और कुछ अन्य प्रमाण भी मिले है, वहीं एक 154 साल पुरानी तस्वीर में दावा किया जा रहा है वहां एक हनुमान मूर्ति भी थी, शिवलिंग के बाद हनुमान जी की मूर्ति का वहां होना क्या खुलासा करता है।
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देशभर में ज्ञानवापी मस्जिद पर नई बहस छिड़ी है, हिंदू पक्ष का दावा है कि यह हिंदू मंदिर है, वहीं मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बता रहा है, इसी बीच एक अहम जानकारी सामने आ रही है, ज्ञानवापी परिसर की 154 वर्ष पुरानी दुर्लभ तस्वीर सामने आई है, यह ऐतिहासिक तस्वीर ज्ञानवापी की अलग ही तस्वीर बयां कर रही है. इसकी प्रमाणिकता भी संदेह के घेरे में नहीं है. यह तस्वीर साल 1868 में ब्रिटिश फोटोग्राफर सैमुअल बॉर्न ने ली थी, इस तस्वीर से साफ है कि मुस्लिम पक्ष जिस ज्ञानवापी मस्जिद परिसर पर अपना दावा करता है उससे अलग ये तस्वीर कुछ और कहानी बयान कर रही है,
इस तस्वीर में ज्ञानवापी परिसर में बाबा के प्रमुख सेवक नंदी और भगवान हनुमान की मूर्ति के साथ ज्ञानवापी परिसर में मौजूद खम्बों पर हिन्दू शिल्पकृतियां और घण्टा लगा हुआ दिखाई दे रहा है और ज्ञानवापी में भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार हनुमान जी भी विराजमान है. इस तरह से ये तस्वीर हिन्दू पक्ष के ज्ञानवापी परिसर में हिन्दू प्रतीक चिन्हों और देवी-देवताओं की मूर्ति होने के दावों को और पुख्ता करती है। ब्रिटिश फोटोग्राफर सैम्युअल बॉर्न ने 7 साल वर्ष 1863 से 1870 तक भारत मे काम किया था.

यह खास तस्वीर साल 1868 में खींची गई थी. यहां हिन्दू पक्ष लगातार ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग के अलावा नन्दी, भगवान हनुमान की मूर्ति और हिन्दू शिल्पकृतियां होने का दावा कर रहा है। ऐसे में हिन्दू पक्ष के दावों पर मुहर लगाती 154 वर्ष पुरानी यह दुर्लभ तस्वीर हिन्दू धर्म में भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार माने जाने वाले हनुमान जी की मौजूदगी का प्रमाण देती है। वैसे तो ज्ञानवापी और काशी विश्वनाथ मंदिर विवाद काफी लंबे वक्त से चला आ रहा है,
लेकिन ताजा मामले में इसकी शुरुआत पाँच महिलाओं की याचिका से होती है। ये याचिका लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक राखी सिंह ने की थी। 5 महिलाओं ने ज्ञानवापी के अंदर श्रृंगार गौरी की पूजा करने की इजाजत माँगी थी। इसी को लेकर वाराणसी कोर्ट ने विवादित ढाँचे के सर्वे का आदेश दिया। इस आदेश के बाद शुरू हुए सर्वे से एक-एक कर चौंकाने वाली सच्चाई सामने आने लगी है।




