यूक्रेन से MBBS करने वाले छात्र भारत में नहीं बनते डॉक्टर, इस टेस्ट में होते है फेल
इन दिनों यूक्रेन से लौटे छात्रों की पढ़ाई को लेकर सवाल उठ रहे है कि इन छात्रों की पढ़ाई पूरी कैसे होगी। भारत में डॉक्टरी करने का सपना लेकर यूक्रेन में MBBS करने जाने वाले छात्र लाखों रूपए खर्च कर रहे हैं लेकिन इसके बाद भी वह भारत में डॉक्टर नहीं बन पाते है। डॉक्टर नहीं बनने की वजह फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (FMGE) का टेस्ट है जिसको पास करना इन छात्रों के लिए आसान काम नहीं है।
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विदेश से मेडिकल की पढ़ाई कर लौटने वाले छात्र ये टेस्ट पास नहीं कर पाते हैं और इसी वजह 10 में से केवल 2 छात्र ही इसमें पास होते हैं। यूक्रेन में लगभग 18 हजार भारतीय छात्र रहते है और वहां मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं। यूक्रेन में MBBS करने के लिए 6 साल का समय लगता है और इस पर 40 लाख रुपये का खर्च आता है और अगर भारत में इसके लिए 70 लाख से ज्यादा का खर्च होता है।

नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन ने बताया कि FMGE का एग्जाम देने वाले लगभग 35 हजार ने ये टेस्ट दिया था लेकिन जिसमें से 5 हजार यानि 16 प्रतिशत ही लोग इसे क्लियर कर पाए थे। अगर 5 साल के परीक्षा परिणाम की बात करें तो लगभग 20 हजार छात्र ही इसमें पास हुए है।
हर साल FMGE की परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। देश में लगभग 600 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें MBBS की 88 हजार सीटें हैं जिसमें से 40 हजार से ज्यादा सीटें प्राइवेट कॉलेजों में है। मेडिकल की पढ़ाई के लिए होने वाली NEET परीक्षा में हर साल 10 से 15 लाख से ज्यादा छात्र बैठते हैं।





