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अब जिम, ब्यूटी पार्लर, रेस्टोरेंट चलाना हुआ महंगा

प्रकाशित: May 26, 2026 15:42रिपोर्ट: Navtej TV

राजस्थान सरकार ने होटल-रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में बड़ा बदलाव करते हुए लाइसेंस सिस्टम को पूरी तरह नया रूप दे दिया है, जिसके चलते पर्यटन और सेवा क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों पर सीधा असर दिखाई दे रहा है। स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जारी किये गए नए आदेश के मुताबिक अब होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, मिठाई की दुकान, जिम, ब्यूटी पार्लर और मोबाइल फूड वैन सहित कुल 18 श्रेणियों की वार्षिक लाइसेंस फीस में 2 से 5 गुना तक की बढ़ोतरी की गयी है। लेकिन इन सब में सबसे बड़ा बदलाव वर्ष 2017 से लागू होटल स्टार रेटिंग सिस्टम के आधार पर लाइसेंस फीस वसूली की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त किया गया है और अब होटल की रेटिंग के बजाय कमरों की संख्या तथा वहां उपलब्ध लग्जरी सुविधाओं जैसे स्विमिंग पूल, जिम, स्पा आदि को आधार बनाकर फीस तय की जाएगी। नए नियमों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 50 से 100 कमरों वाले होटल को अब 50 हजार रुपए वार्षिक लाइसेंस शुल्क देना अनिवार्य किया गया है। जबकि लग्जरी सुविधाओं वाले होटलों के लिए यही शुल्क 75 हजार रुपए तक किया गया है... सरकार ने दावा किया कि यह कदम उन्होंने व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए उठाया है, लेकिन होटल और पर्यटन उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि पहले से ही बिजली दरों, टैक्स और संचालन लागत के दबाव में चल रहा यह सेक्टर अब और अधिक बोझ झेलने को मजबूर हो सकता है... जिसके कारण छोटे और मध्यम स्तर के होटल व्यवसायियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है... उद्योग जगत का मानना है कि लाइसेंस फीस में अचानक 3 से 5 गुना तक की वृद्धि होने से से नए निवेश प्रभावित होंगे और रोजगार के अवसरों में भी कमी आयेगी सरकार ने नियमों को और सख्त करते हुए ये स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध लाइसेंस या नवीनीकरण के संचालन करने वाले प्रतिष्ठानों पर ₹5,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर सीधे सीलिंग की कार्रवाई भी की जा सकती है.... नए आदेशों में यह भी तय किया गया है कि जिन नगरीय निकायों में स्वास्थ्य अधिकारी कार्यरत हैं, वहां वरिष्ठतम स्वास्थ्य अधिकारी लाइसेंस जारी और नवीनीकरण की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि जिन निकायों में स्वास्थ्य अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं वहां यह जिम्मेदारी आयुक्त, जोन उपायुक्त या अधिशाषी अधिकारी को सौंप दी जाएगी। कुल मिलाकर इस नए फैसले को सरकार जहां प्रशासनिक सुधार और राजस्व बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं कारोबारियों के लिए यह बड़ा आर्थिक झटका साबित हो रहा है।