सिसोदिया और जैन ने छोड़ा मंत्री पद, सीएम केजरीवाल ने मंजूर किए इस्तीफे
दिल्ली: लंबे समय से विवादों में रह रहे दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और जेल मंत्री सत्येंद्र जैन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। सिसोदिया को CBI ने हिरासत में लिया था जबकि सत्येंद्र जैन कई महीनों से तिहाड़ जेल में बंद हैं। सीएम केजरीवाल ने दोनों मंत्रियों के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं।
दिल्ली के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद पूरा विपक्ष एक सूर में मोदी सरकार के खिलाफ जमकर आग उगल रहा है। कई दल तो इसे मोदी सरकार की इस कार्यवाही को तानाशही और आपाताकाल से भी ज्यादा खतरनाक बता रहे है लेकिन विपक्ष के इन आरोपों पर बीजेपी ने अपना पक्ष रहते हुए कहा कि इस कार्यवाही में उनका किसी प्रकार से कोई लेना देना नहीं है।
अगर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है तो उनको कानुन पर भरोसा रखना चाहिए क्योंकि कोर्ट में सबको न्याय मिलता है और पीएम खिलाफ विपक्ष जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग कर रहा है उससे उनकी हथासा नजर आ रही है। आप और कांग्रेस एक दूसरे पर जमकर आरोप प्रत्यारोप लगाते है लेकिन सिसोदिया के मामले में आप ने कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को यह केस सौंपा है।
आज फिर CBI जा रहा हूँ, सारी जाँच में पूरा सहयोग करूँगा. लाखों बच्चो का प्यार व करोड़ो देशवासियो का आशीर्वाद साथ है
— Manish Sisodia (@msisodia) February 26, 2023
कुछ महीने जेल में भी रहना पड़े तो परवाह नहीं. भगत सिंह के अनुयायी हैं, देश के लिए भगत सिंह फाँसी पर चढ़ गए थे. ऐसे झूठे आरोपों की वजह से जेल जाना तो छोटी सी चीज़ है
सिंघवी ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच में याचिका लगाई जिस पर आज शाम करीब 4 बजे CJI की अगुआई वाली बेंच इस पर सुनवाई की जाएगी। शराब नीति मामले में CBI ने सिसोदिया से पूछताछ करने के बाद उनको गिरफ्तार कर लिया था और इसके बाद पूरा विपक्ष सिसोदिया के समर्थन में खड़ा हो गया। कोर्ट से सिसोदिया की 5 दिन की रिमांड मांगी थी ,जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।
CBI ने कहा— पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे डिप्टी CM सिसोदिया
CBI ने अदालत को बताया कि सिसोदिया पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं और इस वजह से उनकी 5 दिन की रिमांड मांगी थी। सिसोदिया के वकील ने इसका विरोध किया था लेकिन सिसोदिया को 4 मार्च तक रिमांड पर भेजा है।
सिसोदिया ने ऐसी शराब नीति बनवाई थी जिसको लेकर बीजेपी ने जमकर प्रदर्शन किया था। इसके बाद शराब नीति का फैसला वापस लिया गया है और इसके बाद इस मामले में ED और CBI की एंट्री हुई थी। शराब नीति से व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसी नीति बनाई थी और इसके माध्यम से करोड़ो रूपए का घोटाला होने की बात कही थी। इस मामले में कहा गया कि जब नीति सही थी तो इसे वापस क्यों लिया गया।





