यूक्रेन में फंसे भारतीयों की वतन वापसी के लिए शुरू हुआ 'मिशन एयरलिफ्ट'
रूस और यूक्रेन के बीच जंग शुरू हो गयी है और इसी वजह से पूरी दुनिया तीसरे विश्व यूद्व की तरफ बढ़ रही है। इस हालात में यूक्रेन में फंसे हजारों भारतीयों के लिए भी चिंता बढ़ गई है, ऐसे में यूक्रेन से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने कूटनीतिक पहल की है, पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की है और विवाद का हल वार्ता से करने की सलाह दी है।
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पीएम मोदी ने यूक्रेन में फंसे करीब 16 हजार भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी की बैठक बुलाई, इस बैठक में नागरिकों को सुरक्षित निकालने और यूक्रेन की स्थिति पर चर्चा की गई, रूस के हमलों के बाद यूक्रेन ने अपनी हवाई सीमाओं को बंद कर दिया है. ऐसे में भारत हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और रोमानिया के जरिए सड़क रास्तों से भारतीयों को निकालने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, वहीं पीएम मोदी ने यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं के बारे में रूसी राष्ट्रपति पुतिन को अवगत कराया कराया और पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपने नागरिकों के सुरक्षित निकास और भारत लौटने को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

वहीं विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री ने सीसीएस बैठक में बताया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता छात्रों समेत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और यूक्रेन से उन्हें निकालना है. उन्होंने कहा, मैं यूक्रेन के छात्रों और उनके परिवार के सदस्यों समेत सभी भारतीय नागरिकों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम आपको सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे, यूक्रेन में करीब 20,000 भारतीय नागरिक फंसे थे. इनमें से करीब 4000 लोग पिछले दिनों वापस लौट चुके हैं.
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श्रृंगला ने कहा कि सरकार ने यूक्रेन के पड़ोसी देशों जैसे पोलैंड, स्लोवाकिया, रोमानिया और हंगरी में भारतीय राजदूतों से कहा है कि वे अपने मिशन से यूक्रेन के बॉर्डर क्षेत्रों में टीमों को भेजें ताकि भारतीयों को बाहर निकाला जा सके और उन्हें भारत लाया जा सके। वहीं पोलैंड में भारतीय दूतावास ने कहा कि पोलिश-यूक्रेनी सीमा पर क्राकोविएक में एक कैंप बनाया जा रहा है, ताकि पोलैंड की मदद से भारतीयों को यूक्रेन से बाहर निकालने में मदद मिल सके. इसी तरह से लविव में भी एक ऑफिस बनाया जा रहा है, और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर पोलैंड, स्लोवाकिया, रोमानिया और हंगरी में अपने समकक्षों में बात कर रहे हैं, ताकि यूक्रेन संकट के बीच फंसे भारतीय नागरिकों को वहां से बाहर निकाला जा सके।





