सेम सेक्स मैरिज के विरोध में उतरी मोदी सरकार, जानें इसकी पूरी सच्चाई
समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता देने की मांग से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। इस मामले को लेकर केंद्र सरकार ने कोर्ट में हलफनामा पेश किया जिसमें इस प्रकार की शादियों के खिलाफ अपनी बात रखी है। सरकार ने कहा कि ये गैरकानूनी नहीं हैं लेकिन इसको मान्यता दिए जाने का विरोध किया।
इस प्रकार की शादियां भारतीय समाज में मान्य नहीं है और इस प्रकार का चलन हमारे समाज के लिए ही नुकसानदायक साबित होगा। अगर इस प्रकार की शादी को मान्यता मिलती है तो इसका समाज पर बुरा असर देखने को मिलेगा और कोई भी परिवार इस प्रकार की शादी का स्वीकार नहीं करेंगा।
शादी दो लोगों के मिलने से होती है और इसमें एक लड़का और लड़की होती है जिसे समाज स्वीकार करता है। लेकिन इस प्रकार की मांग करना गलत है समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं दी जा सकती। इस प्रकार के विवाह को मान्यता न देने की वजह से किसी भी मौलिक अधिकार का हनन नहीं हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अवैध बताने वाली धारा 377 की वैधता पर अहम फैसला सुनाया था। कई देशों में इस प्रकार के विवाह को मान्यता मिली हुई है लेकिन भारत में इसका विरोध किया जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी कई लोग इस प्रकार की शादी कर रहे है। नीदरलैंड ने सबसे पहले समलैंगिक शादियों को कानूनी तौर पर स्वीकार किया था।





