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BJP के चाणक्य को भी मात दे गए बिहारी बाबू, पाला बदलने से बचेगा वजूद

प्रकाशित: Aug 15, 2022 08:18रिपोर्ट: Navtej TV

राजनीति करने वाले नेताओं के लिए दोस्ती और दुश्मनी की एक ही परिभाषा है मौका देकर चौका मारना और ऐसा ही कुछ देखने को मिला है बिहार में, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्ष की सरकारें पलटने में माहिर भाजपा इस बार नीतीश कुमार से हार गई है। 6 साल में 7 राज्यों में सेंधमारी की कोशिश करने वाली भाजपा 4 राज्यों में सरकार बनाने में कामयाब रही लेकिन नीतीश कुमार से दो.दो बार मात खा गई। कहा जा रहा है कि की इफ्तार पार्टी से ही बीजेपी को मात देने की तैयारी शुरू हो गई थी

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5 साल से राबड़ी आवास नहीं गए नीतीश कुमार जब पैदल ही की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए तो सत्ता पलटने की तैयारी हो गई अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की इफ्तार पार्टी में एक बार फिर दोनों की मुलाकात हुई और इसी बीच राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज हो गई। विधानसभा में बीजेपी वीआईपी के तीनों विधायकों को शामिल करा सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। यही चाल नीतीश कुमार ने चली और 29 जून को ओवैसी की पार्टी के चार विधायकों में शामिल करा दिया।

इससे सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई और सरकार बनाना का दावा ठोकने की दावेदार बन गई। ऐसा करके नई सरकार का दावा करने के बीजेपी के मंसूबों पर पानी फिर गया। विपक्ष में रहते हुए भी राजनीतिक तल्खियों से बचते हुए तेजस्वी ने ब्ड नीतीश के साथ मिलकर ऐसा खाका बुना कि ताकते रह गई।

17 साल से बिहार में सत्ता की कमान संभाल रहे नीतीश कुमार आठवीं बार मुख्यमंत्री बने हैं ये अपने आप में बिहार की राजनीति में एक रिकॉर्ड है नीतीश कुमार भले ही अपने दम पर सरकार ना बना सके हों लेकिन बिहार की सत्ता के धुरी जरूर बने हुए हैं इसी का नतीजा है कि नीतीश कुमार कभी एनडीए तो कभी महागठबंधन के साथ हाथ मिलाकर सत्ता पर बने हुए हैं।

वहीं आपकों बतां दे कि बिहार की राजनीति के लिए अर्थव्यवस्था कभी बड़ा इश्यू नहीं रहा हैण् चेहरों पर लड़े जाने वाले चुनाव में अपराधए जातिए भ्रष्टाचार आदि ही हावी रहते आए हैं पिछले कुछ दशक में तो बिहार की राजनीति जंगलराज बनाम सुशासन के बहस पर केंद्रित रहते आई है फिर भी गहराई में जाकर खोजें तो आर्थिक लिहाज से विशेष राज्य का दर्जा और स्पेशल पैकेज की मांग ये दो मुद्दे निकलकर सामने आते हैं अभी जब नीतीश कुमार और भाजपा का ताजा ब्रेकअप हुआ है तो ये दोनों गड़े मुद्दे भी बोतल में कैद जिन्न की तरह बाहर निकल आए हैं बिहार की राजनीति में बोतल में कैद जिन्न के बाहर आते रहने की परंपरा भी रही है तो इस बार नीतीश कुमार और उनके नए सहयोगी तेजस्वी यादव इन दोनों मुद्दों के सहारे भाजपा को घेरने का प्रयास कर रहे हैं।