अलविदा बैंसला: एक इशारे पर थम जाता था राजस्थान,जानें सिपाही से कर्नल बनने तक सफर
कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का आज लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया, बैंसला गुर्जर आरक्षण आंदोलन का बड़ा चेहरा थे, उन्होने 1962 का भारत-चीन और 1965 का भारत-पाकिस्तान का युद्ध भी लड़ा, अपनी जाबांजी के कारण ही उन्हें सेना में सिपाही से कर्नल बनाया गयाकौन थे किरोड़ी सिंह बैंसला कहां हुआ जन्म!
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राजस्थान के करौली जिले के मुंडिया गांव में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का जन्म हुआ, उन्होने केरियर की शुरूआत शिक्षक के तौर पर की थी लेकिन पिता के फौज में होने के कारण उनका भी फौज की तरह रूझान हो गया, इसके बाद वो सेना के राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए सेना में रहते हुए उन्होने 1962 का भारत-चीन युद्ध और 1965 का भारत पाकिस्तान का युद्ध भी लड़ा।
सेना से रिटायरमेंट के बाद किरोड़ी सिंह बैंसला ने गुर्जर समुदाय के लिए लड़ाई शुरू की, आंदोलन के दौरान कई बार उन्होने रेल रोकी, पटरियों पर धरना दिया, बैंसला का कहना था कि जिस तरह राजस्थान के मीणा समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया था जिससे उन्हे सरकारी नौकरी में सही प्रतिनिधित्व मिला वैसे ही गुर्जरों के लिए होना चाहिए गुर्जरों को भी उनका हक मिलना चाहिए।
2008 में गुर्जर आंदोलन के कारण सीएम वसुंधरा राजे को काफी चुनौतियां झेलनी पड़ी और विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा, इसके बाद कांग्रेस की गहलोत सरकार आई और गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की मांगो के स्वीकार किया।

रिटायरमेंट के बाद बैंसला ने राजनीति में प्रवेश करते हुए बीजेपी की सीट से टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा लेकिन 317 वोटों से हार गए, जिसके बाद उन्होने बीजेपी छोड़ दी और फिर दोबारा 2019 में बीजेपी में शामिल हुए।कर्नल बैंसला के निधन पर उनके चाहने वालों में मायूसी देखने को मिल रही है. गुर्जर समाज को जाने माने नेता कर्नल बैंसला को ‘गुर्जर गांधी’ के नाम से भी संबोधित किया जाता था. केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने गुर्जर नेता के निधन पर शोक व्यक्त किया और ट्वीट कर लिखा- कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के निधन का समाचार दुखद है।





