पूर्व सीएम राजे जन्मदिन के बहाने दिखाएगी अपनी ताकत, हाईकमान को सीधी चुनौती, सीएम पद नहीं तो क्या बगावत?
राजस्थान के चुनावी रण में अब सभी उम्मीदावारों ने अपनी ताल ठोकना शुरू कर दिया है क्योंकि चुनावों में अब 10 माह से भी कम का समय बचा है। लेकिन इस बार बीजेपी—कांग्रेस अपनी जीत से ज्यादा सीएम पद को लेकर चर्चा में है क्योंकि बीजेपी में इस बार 5 चेहरे सीएम पद की रेस में शामिल है तो कांग्रेस में सीएम पद को लेकर पायलट—गहलोत की जंग किसी से छूपी हुई नहीं है। राजस्थान की जनता हर बार सरकार बदलने का काम करती है और इसी वजह से सरकार बदलती रहती है और इस बार इस पंरपरा को तोड़ने के लिए सीएम गहलोत ने कई अहम फैसले किए है लेकिन उनके फैसलों पर जनता कितना विश्वास जताती है यह तो चुनावों की नतीजों के बाद ही पता चलेगा। लेकिन राजे के नाम पर चुनाव लड़ गया तो उन्होंने प्रचंड जीत के साथ सरकार बनाई थी और जनता में उनकी दिवानगी किसी से छूपी नहीं है लेकिन परिवर्तन भी जरूरी है। मौजुदा समय में 30 से विधायक राजे के साथ खड़े है तो 10 सांसद भी उनके साथ नजर आते है।
लेकिन इस बार बीजेपी की अंनदरूनी लड़ाई अब सड़कों पर दिखनी शुरू हो गई है क्योंकि 2 बार सीएम रह चुकी वसुंधरा राजे अपनी ताकत दिखाने के लिए अपने जन्मदिन को विशेष रूप से मनाने का फैसला किया है। महारानी के नाम से अपनी पहचान बना चुकी राजे इस बार किनारे खड़ी नजर आ रही है कई बार ऐसे मौके आए जब उनको पीएम मोदी या राष्ट्रिय अध्यक्ष से भी ज्यादा तवज्जो नहीं मिल रहा और इसी वजह से दिल्ली आलाकमान को अपनी ताकत दिखाने के लिए 4 मार्च को अपना जन्मदिन बड़े स्तर पर मनाने का फैसला किया है।
4 मार्च को राजे के जन्मदिन को सफल बनाने के लिए विशेष तैयारियां की गई और राजे गुट के विधायक कालीचरण सराफ, यूनुस खान, अशोक परनामी, भवानी सिंह राजावत जैसे नेताओं ने पूरी जिम्मेदारी संभाल रखी है। तो वहीं दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष के साथ अन्य नेताओं ने इस कार्यक्रम को लेकर किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी है क्योंकि इससे पहले भी राजे के जन्मदिन को शक्ति प्रदर्शन के रूप में मनाया गया था। लेकिन इस बार उनके जन्मदिन को लेकर कई बाते निकलकर सामने आ रही है क्योंकि बीजेपी में सीएम पद को लेकर इस बार पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले है क्योंकि बीजेपी प्रदेश में दो खेमों में बटी हुई।
जन्मदिन के बहाने सियासी संदेश
राजे इस जन्मदिन के बहाने दिल्ली आलाकमान को संदेश देना चाहेगी की जनता के बीच उनकी लोकप्रियता पहले जैसे ही है और जनता उनको फिर से सीएम बनाने की मांग कर रही है। तो वहीं प्रदेश के विरोधी नेताओं को अपनी शक्ति का अहसास कराके बताना चाहेगी की वह जनताा से जुड़ी हुई है और उनको सीएम पद की दावेदारी से कोई नहीं रोक सकता है। उनके खेमे के नेता तो अब दिल्ली आलाकमान को ही ज्ञान देने लग गए है कि जनता राजे को सीएम बनानी चाहती है और आलाकमान जनता की मांग को टाल नहीं सकता। प्रदेश में उनके सामने किसी अन्य उम्मीदवार की इतनी लोकप्रियता नहीं है जो बीजेपी की सरकार बना दें।
बगावती तेवर
पिछले लंबे समय से दिल्ली आलाकमान और राजे का तालमेल सही नहीं दिख रहा है और ऐसा कई बार देखा जा चुका है। इस बात को राजे ने अच्छे से भाप लिया हे और इसी वजह से उन्होंने फैसला किया है कि अगर समय रहते अपने पक्ष में माहौल नहीं बनाया तो सीएम की उम्मीदवारी उनके हाथ से निकली जाएगी। लेकिन राजे को इस बात का अहसास हो चुका है कि इस बार आलाकमान उनके नाम पर चुनाव नहीं लड़ेगा और इसी वजह से उनका सीएम बनने का सपना पूरा नहीं होगा। राजनीति के जानकारों की माने तो पायलट की तरह राजे ने भी बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए है लेकिन उनको इस बात का पता नहीं है कि कांग्रेस में बड़ा फैसला लेने की इतनी हिम्मत नहीं है जो मोदी—शाह के पास है।
श्याम भक्तों के लिए मंदिर कमेटी और प्रशासन ने बिछा दिए पलक पावड़े, बाबा श्याम निकले नगर भ्रमण पर
सीएम के कई दावेदार
बीजेपी में इस बाद एक नहीं 5 सीएम चेहरों को लेकर चर्चा हो रही है जिसमें पहले नंबर पर केंद्रिय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का है तो दूसरी नंबर पर जयुपर ग्रामिण सांसद राज्यवर्ध राठौड़ का है तो तीसरे नंबर पर प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया तो चौथे नंबर पर अर्जुनराम मेघवाल तो दिया कुमारी का नाम भी इस लिस्ट में है।
नेता प्रतिपक्ष
गुलाब चंद कटारिया के राज्यपाल बनने के बाद नेता प्रतिपक्ष का पद भी खाली है लेकिन इसको लेकर कई प्रकार की बाते सामने आ रही है। जानकारों की माने तो प्रतिपक्ष के लिए राजेन्द्र राठौड़ के नाम पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी।





