श्री कृष्ण की यादों से जुड़े पर्वतों कोे बचाने के लिए बाबा विजय दास ने दिया अपना बलिदान
भारत में हमेशा से जंगल, जमीन और जल के लिए संघर्ष होता रहा है और इनको बचाने के लिए कई लोगों ने अपने प्राणों की बली तक दे डाली लेकिन इसके बाद इनको लेकर सरकार ज्यादा संवेदनशील नहीं दिखी है। हाल ही में भरतपुर में जो घटना हुई उसको लेकर कांग्रेस सरकार पर कई सवाल खड़े हो रहे है कि जब यह आंदोलन लगभग 500 दिनों से चला रहा था तो इस मामले में संत समाज की अनदेखी की गई थी।
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ब्रज क्षेत्र में खनन बंद कराने की मांग को लेकर बाबा विजय दास महाराज ने राधे.राधे कहते हुए खुद को आग लगा ली तो सराकर की परेशानी बढ़ गई। इस मामले को लेकर सरकार ने उचित कार्यवाही करते हुए बाबा की मांग तो पूरी कर दी लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी और वह इस लड़ाई में अपने प्राण तक त्याग दिए।
खनन बंद करने की मांग को लेकर संत समाज 550 दिन से आंदोलन कर रहा था लेकिन समय रहते इस आंदोलन पर ध्यान नहीं दिया गया। ब्रज क्षेत्र में आने वाला आदिबद्री और कनकांचल पर्वत भगवान कृष्ण की मान्यताओं से जुड़ा हुआ है।ब्रज के लोगों की भगवान कृष्ण में गहरी आस्था है इसी वजह से बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम की तरह इसका भी बहुत महत्व है।

प्राचीन मान्याताओं के अनुसार माता पिता को तीर्थ करवाने के लिए भगवान कृष्ण के आह्वान पर आदिबद्री ब्रज क्षेत्र में अवतरित हुए और यह क्षेत्र चौरासी कोस परिक्रमा में आता है। भगवान कृष्ण के माता.पिता ने जब चार धाम की तीर्थ यात्रा करने की मांग को पूरा किया। संत समाज 550 दिन से आदिबद्री और कनकांचल पहाड़ पर चल रहे अवैध खनन का विरोध कर रहा था। भगवान कृष्ण इन पर्वतों में गोपियों के साथ रासलीला किया करते थे।





