सीएम पद के लिए पायलट की खामोशी और वसुंधरा की बेताबी से दिल्ली में मची हलचल
राजस्थान में 2023 में होने वाले विधानसभों चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है, सचिन पायलट की चुप्पी और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की बैचेनी से राज्य की सियासत में उठापटक के संकेत मिल रहे है। राजस्थान की बीजेपी और कांग्रेस की सियासी रणनीति पर देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट दो साल से बिना किसी पद के है। सचिन पायलट की खामोशी आने वाले तूफान का संकेत माना जा रहा है। बागी तेवरों के चलते पायलट को पद से हटाया गया था, कहा जा रहा पायलट की इस खामोशी में उनकी नाराजगी छुपी हुई है। अगर 2023 के चुनावों से पहले कांग्रेस हाईकमान सचिन पायलट को एडजस्ट नहीं करता है तो कांग्रेस को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ेगा। कांग्रेस आलकमान के सामने सचिन पायलट को एडजस्ट करना चुनौती बना हुआ है।
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पायलट राजस्थान छोड़ना नहीं चाहते तो सीएम गहलोत सीएम पद छोड़ना नहीं चाहते। कांग्रेस रणनीतिकार गहलोत-पायलट की जिद की वजह से दुविधा की स्थिति में हैं, कांग्रेस के दोनों ही दिग्गज नेता अपनी-अपनी जिद्द पर अड़े है। दूसरी तरफ राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी की बात करे तो बीजेपी के कुछ कांग्रेस जैसे ही हालात है, भाजपा में सीएम फेस को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत-पूनिया गुट आमने-सामने हैं। पिछले तीन वर्षों से राजे प्रदेश के भाजपा नेतृत्व से खुश नहीं है, इसलिए वे समय समय पर अपना राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन करती रहती है।

गत 8 मार्च को ही अपने जन्मदिन पर बूंदी में राजे ने केशोराय पाटन मंदिर में अपना जन्मदिन धार्मिक अनुष्ठान के साथ मनाया। इस अवसर पर प्रदेश के कई सांसद और करीब चालीस विधायक उपस्थित रहे। राजे के शक्ति प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री से मुलाकात होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि मोदी और राजे के बीच प्रदेश में बीजेपी के नेतृत्व को लेकर चर्चा हुई है। पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय राजनीति में राजे की सक्रियता अचानक बढ़ गई है। उत्तराखंड सीएम धामी और उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण में भी राजे को देखा गया।
राजस्थान में अगले साल यानि 2023 में विधानसभा चुनाव होने है जिसको लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज हो गई, कांग्रेस और बीजेपी जनता के बीच अपनी पकड़ बनाने में जुटी हुई है, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की खामोशी और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की बैचेनी से राज्य की सियासत में उठापटक होती है ये तो आने वाला समय ही बताएंगा।





