काबिलियत का कमाल , मुकेश कुमार का धमाल
संघर्षों में सफलता की कहानी कुछ नया सीखा कर जाती है ऐसा ही एक चेहरा आज सब लोगों की जुबा पर हैं गोपालगंज के काकड़कुंड गाँव के रहने वाले मुकेश कुमार ने क्रिकेट की दुनिया में अपनी जगहा बना ली हैं इसी के साथ मुकेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं टीम इंडिया में शामिल होने की खबर मिलते ही उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था और परिवार के सदस्यों में भी ख़ुशी की लहर दौड़ गयी | बेटे की सफलता पर गर्व करते हए माँ मालती देवी ने कहा कि मेरा बेटा अब देश के लिए खेलेगा | वैसे तो माँ – बाप के लिए बच्चों का सफल हो जाना जिंदगी भर की कमाई से कम नहीं या फिर कहें किसी जन्नत से कम नहीं|
कुल्लू का अनोखा दशहरा, देवलोक से आते हैं देवी-देवता

मुकेश ने 20 साल की उम्र से पहले कभी भी पेशेवर रूप से क्रिकेट नही खेला था उनके पिता कोलकातामें टैक्सी चालक थे परिस्थितियों के चलते उनके पिता ने उन्हें कोलकाता बुला लिया | कोलकाता में मुकेश क्लब क्रिकेट खेलने लगे , अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हेंबिहार के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेलना का भी मौका मिला | इस बीच मुकेश ने सेना में शामिल होने के लिए जमकर प्रयास किया लेकिन वह तीन बार मेडिकल टेस्ट में फ़ैल हो गये | आर्थिक दिक्कतों के चलते खेप के नाम से मशहूर टूर्नामेंट में खेलने लगे जिसमें उन्हें प्रति मैच 500 रूपये मिलते थे 2014 में बंगाल क्रिकेट संघ के ट्रायल में हिस्सा लिया | उनके कोच रानादेव ने उनके अन्दर की प्रतिभा को पहचना और अब वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिएभारतीय टीम में अपना स्थान ले चुकें हैं

