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ताजमहल के 22 बंद कमरों में छूपा है मंदिर या मकबरे का राज,जानें इसका पूरा रहस्य

प्रकाशित: May 10, 2022 19:09रिपोर्ट: Navtej TV

भारत का इतिहास कई सालों पुराना है और इससे जुड़े कई ऐसे राज आज भी खुदाई के दौरान मिलते रहते है। लेकिन भारत की प्रसिद्व इमारतों को लेकर ऐसे दावे किए जाते है कि इनका निर्माण भारत के राजाओं ने करवाया लेकिन जब मुगलों ने भारत पर शासन किया तो उन्होंने इन इमारतों को तोड़ दिया या फिर उनकी जगह मस्जिद या मकबरे बना दिए। आजादी के बाद से कई प्राचीन स्थलों को लेकर विवाद होता रहा है और इसके कारण इन मामलों को कोर्ट तक ले जाया गया है।

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विश्व के 7 अजूबों में अपनी पहचान बनाने वाला ताजमहल इन दिनों लोगों के लिए चर्चा का विषय बना है। इसको लेकर दावा किया जा रहा है कि इसका निर्माण जयसिंह ने करवाया था लेकिन बाद में मुगल शासकों ने इसे मकबरे का रूप देखकर इसका नाम ताजमहल रख दिया।

ताजमहल को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की है जिसमें दावा किया गया है कि ताजमहल में पहले शिव मंदिर था और इसका नाम तेजो महालय था। शिव मंदिर है या मकबरा इसको लेकर लोगों को जानकारी होनी चाहिए। इसका सच तब आएगा जब इसके बंद दरवाजे खुलेंगे, तो यह विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

ताज के बंद दरवाजों को खोलना आसान काम नहीं है क्योंकि इसके लिए कोरोडों रूपए खर्च करने होंगे। तो दूसरी तरफ वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा मिला है तो इसमें UNESCO भी दखल देगा। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम और फिर ऐसी टीम भी जो इसकी जांच करेगी तो उस समय अगर कोई स्ट्रक्चर जरा सा भी क्षतिग्रस्त हुआ, तो उसे ठीक करना आसान काम नहीं होगा।


कई किताबों में लिखा गया है कि राजा परमारदी देव ने तेजो महालय बनवाया था, जो बाद में जयपुर के राजा मान सिंह को विरासत में मिला था। यही बाद में राजा जय सिंह को मिला लेकिन शाहजहां ने तेजो महालय को तुड़वाकर इसे मकबरे का रूप दे दिया। दुनिया में मुस्लिम राजाओं ने भारत के अलावा ऐसे महल कई नहीं बनाए जो इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने दूसरे की बनी हुई इमारत को तोड़कर उसे नया आकार दिया है औरंगजेब के काल में मुमताज के मकबरे की मरम्मत के निर्देश दिए थे और जबकि उस समय तो ऐसा करने की जरूरत नहीं थी। क्योंकि शाहजहां ने इसका निर्माण करवाया था तो इतनी जल्दी खराब कैसे हुआ।