बिना चुनाव लड़े सीएम बने ये 6 नेता, लेकिन इस बार योगी और अखिलेश तोड़ेंगे ये परम्परा
10 मार्च को इस बात खुलासा होगा की जनता ने किसको सीएम का ताज देने का फैसला किया है। लेकिन इन सबसे हटकर अगर पिछले 3 विधानसभा चुनावों का ट्रेंड ये कहता है कि UP में पिछले 15 सालों में वो CM नहीं बनता, जो विधायकी का चुनाव लड़ता है, जी हां कुछ ऐसी ही दिलचस्प स्टोरी है यूपी के सियासी गलियारों की, हम आपकों उन 6 मुख्यमंत्रियों की कहानी बतां रहे है जो चुनाव जीते बिना ही बन गए सीएम,
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त्रिभुवन नारायण सिंह बिना लड़े बने थे पहले सीएम!
18 अक्टूबर 1970 को त्रिभुवन नारायण सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया था उस समय वो विधान मंडल के सद्स्य भी नहीं थे, तो हर शरण वर्मा नाम के एक शख्स ने टीएन सिंह की सीएम नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, याचिकाकर्ता ने आर्टिकल 164(4) का हवाल देते हुए तर्क दिया कि विधायिका का सदस्य रहे बिना कोई भी व्यक्ति मंत्री नहीं बन सकता। टीएन सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, 'मुझे चुनाव लड़ने और जीतने के लिए 6 महीने का वक्त मिलना चाहिए, क्योकि आर्टिकल 164(4) केवल मंत्रियों पर लागू होता है, मुख्यमंत्री पर नहीं, तब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने संविधान सभा की बहसों और अन्य कई प्रावधानों का हवाला देते हुए निष्कर्ष निकालते हुए सीएम त्रिभुवन नारायण को 6 महीने का वक्त दिया था, लेकिन 5 महीने बाद हुए उपचुनाव में वो हर गए और उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
3 बार के विधायक मुलायम सिंह से भी बड़े नेता माने जाते थे राम नरेश!
1977 में उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए, जनता पार्टी की सरकार बनी। राम नरेश यादव तीन बार के विधायक रहे मुलायम से भी बड़े नेता माने जाते थे, इसलिए चौधरी चरण सिंह ने उनको मुख्यमंत्री बना दिया, राम नरेश पहले से ही सांसद थे, लेकिन विधायिका के सदस्य नहीं थे। वो विधायक नहीं बन पाए थे। हालांकि, मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा क्षेत्र निधौलीकलां से उपचुनाव जीत कर विधायक बन गए थे। लेकिन पार्टी की अंदरूनी कलह के चलते उन्होने 1 साल 249 दिन बाद सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था।

राजनीति से संन्यास ले चुके राम प्रकाश को अचानक बना दिया गया सीएम!
1999 में यूपी में बीजेपी की सरकार थी, सीएम कल्याण सिंह को पार्टी से निकाल दिया गया था और अचानक 15 साल पहले राजनीति से सन्यास ले चुके रामप्रकाश गुप्ता को सीएम बना दिया गया फैसला अटल जी का था तो कोई कुछ नहीं बोल पाया, रामप्रकाश को बिना विधानमंडल का सदस्य चुने ही सीएम बना दिया गया था, वो केवल 11 महीने तक ही सीएम रहे।
जब राज्यसभा सांसद मायावती को बनाया गया था सीएम!
3 जून 1997 को जब मायावती सीएम बनीं तब वो राज्यसभा सांसद थीं, बसपा प्रमुख कांशीराम ने अचानक उन्हें अपना उत्तराधिकारी बताते हुए मुख्यमंत्री की गद्दी सौंप दी थी। वो केवल 137 दिन तक ही सीएम रह पाईं थी क्योंकि बीजेपी ने अपना समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद जब मायावती ने 13 मई, 2007 को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तब वे किसी भी सदन की सदस्य नहीं थीं विधान परिषद का सदस्य होने की हैसियत से मुख्यमंत्री बन गई थीं। वहीं 2022 के विधानसभा चुनावों में भी मायावती चुनाव नहीं लड़ रही हैं।
सांसद अखिलेश यादव की की गई थी सरप्राइज सीएम लॉन्चिंग!
साल 2012 में विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने बहुमत हासिल किया था, तब अखिलेश यादव सांसद थे तो अचानक पिता मुलायम सिंह ने अखिलेश का नाम घोषित कर दिया था, अखिलेश ने सांसद पद से इस्तीफा देकर सीएम पद की शपथ ली थी, अखिलेश ने विधायक का कोई चुनाव नहीं लड़ा लेकिन इस बार करहल विधानसभा सीट से अखिलेश चुनाव मैदान में है।

2017 के विधानसभा चुनावों में प्रमुख प्रचारक रहे योगी आदित्यनाथ को बनाया गया सीएम!
गोरखपुर से सांसद रहे योगी आदित्यनाथ साल 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के प्रमुख प्रचारक थे, बहुमत मिलते ही बीजेपी आलाकमान ने योगी आदित्यनाथ के नाम की घोषणा कर दी, सीएम योगी इस बार गोरखपुर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में है।
तो ये थे वो 6 मुख्यमंत्री जो बिना विधानसभा का चुनाव लड़े बन गए थे सीएम, वहीं इस बार योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव चुनाव मैदान में है, तो क्या पिछले 15 सालों से चला रहा ये सिलसिला की यूपी में बिना विधायकी का चुनाव लड़ने वाले सीएम बने इस बार ये सिलसिला टूट जाएगा या बरकरार रहेगा, ये तो आने वाला समय ही बताएंगा।





