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अमिताभ बच्चन का खुलासा: 'कुली' सेट के हादसे में चढ़े खून से हुआ था हेपेटाइटिस बी; 25% लिवर के सहारे जी रहे हैं एक्टिव जिंदगी

अमिताभ बच्चन को 1983 में फिल्म कुली के सेट पर हादसे के दौरान चढ़ाए गए खून के जरिए हेपेटाइटिस बी का संक्रमण हुआ था, जिससे उनके लिवर का 75 फीसदी हिस्सा प्रभावित हो गया था।

प्रकाशित: Aug 20, 2026 14:01रिपोर्ट: HarshitaNew Delhi, IndiaVerified

मुख्य बातें

  • अमिताभ बच्चन को 1983 में कुली के सेट पर हेपेटाइटिस बी का संक्रमण हुआ था।
  • संक्रमण का पता 2005 में एक रूटीन चेकअप के दौरान चला था।
  • बिग बी वर्तमान में केवल 25 प्रतिशत लिवर के सहारे सक्रिय जीवन जी रहे हैं।
  • हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए वैक्सीनेशन सबसे असरदार तरीका है।

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन आज 83 साल की उम्र में भी फिल्मों में सक्रिय हैं और अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रखते हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा है। साल 1983 में फिल्म 'कुली' के सेट पर हुए एक गंभीर हादसे के दौरान उन्हें करीब 200 डोनर्स से 60 बोतल खून चढ़ाया गया था। इसी दौरान डोनर के रक्त से उनके शरीर में हेपेटाइटिस बी का वायरस पहुंच गया था, जिसका पता सालों बाद 2005 में एक रूटीन चेकअप के दौरान चला। तब तक यह वायरस उनके लिवर का 75 फीसदी हिस्सा खराब कर चुका था। आज भी बिग बी केवल 25 प्रतिशत लिवर के सहारे अपनी दिनचर्या चला रहे हैं।

सालों तक बिना लक्षणों के रहता है एक्टिव

हेपेटाइटिस बी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह संक्रमण लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर के अंदर चुपचाप पनपता रहता है। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत के मुताबिक, मरीज बाहर से पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य दिखता है, जबकि अंदरूनी तौर पर लिवर लगातार क्षतिग्रस्त होता रहता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में करोड़ों लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी के साथ जी रहे हैं। समय रहते इसकी पहचान न होने पर यह संक्रमण लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति में बदल सकता है। यही वजह है कि बाहर से फिट दिखने वाले लोगों को भी नियमित अंतराल पर लिवर फंक्शन टेस्ट कराते रहना चाहिए।

लिवर की बीमारी में कसरत कितनी सही?

क्रॉनिक लिवर डिजीज के मरीजों में अक्सर 'सारकोपेनिया' की समस्या हो जाती है, जिसमें मांसपेशियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं और गलने लगती हैं। आधुनिक मेडिकल साइंस अब ऐसे मरीजों को पूरी तरह बेड रेस्ट की बजाय डॉक्टर की निगरानी में हल्की एक्सरसाइज करने की सलाह देता है।

हाल ही में फ्रंटियर्स जर्नल में पप्रदर्शित एक रिसर्च के मुताबिक, सिरोसिस के मरीजों ने जब नियमित रूप से हल्की कसरत की, तो उनके 6 मिनट वॉक टेस्ट में करीब 54 मीटर का सुधार देखा गया। साथ ही पैरों की ताकत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के जिम में भारी वजन उठाना शुरू कर दें। कसरत का उद्देश्य बॉडीबिल्डिंग नहीं, बल्कि लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना मांसपेशियों को बचाना है।

हेपेटाइटिस बी के मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां

शालीमार बाग स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. रमेश गर्ग का कहना है कि इस बीमारी से निपटने के लिए निरंतर निगरानी सबसे बड़ा हथियार है।

  • नियमित जांच: डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिवर एंजाइम, वायरल लोड और लिवर की स्थिति का समय-समय पर आंकलन कराएं।
  • दवाओं में अनुशासन: डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएं बिना नागा लें। हर मरीज को तुरंत दवा की जरूरत नहीं होती, लेकिन वायरल एक्टिविटी के आधार पर समय पर इलाज शुरू करना जरूरी है।
  • लिवर को नुकसान से बचाना: बिना मेडिकल सलाह के कोई भी पेनकिलर, सप्लीमेंट्स या देसी काढ़े लेने से बचें, जो कमजोर लिवर पर भारी पड़ सकते हैं।
  • खानपान और लाइफस्टाइल: संतुलित आहार लें और वजन नियंत्रित रखें। अगर डायबिटीज या फैटी लिवर जैसी अन्य समस्याएं भी हैं, तो लाइफस्टाइल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

हेपेटाइटिस बी से बचाव का सबसे अचूक और सुरक्षित जरिया वैक्सीनेशन है। डॉक्टरों का कहना है कि अमिताभ बच्चन का जीवन इस बात की मिसाल है कि सही मेडिकल निगरानी, समय पर इलाज और अनुशासित दिनचर्या के साथ गंभीर बीमारी के बावजूद सक्रिय जीवन जिया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अमिताभ बच्चन को हेपेटाइटिस बी कैसे हुआ था?

अमिताभ बच्चन को साल 1983 में फिल्म 'कुली' के सेट पर दुर्घटना के दौरान चढ़ाए गए रक्त के जरिए हेपेटाइटिस बी का संक्रमण मिला था, जिसकी जानकारी उन्हें साल 2005 में हुई थी।

हेपेटाइटिस बी के लक्षण दिखने में कितना समय लगता है?

हेपेटाइटिस बी का वायरस लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर के अंदर चुपचाप पनपता रहता है, जिससे बाहर से मरीज एकदम स्वस्थ दिख सकता है लेकिन अंदरूनी क्षति जारी रहती है।

क्या लिवर की बीमारी में एक्सरसाइज करना सुरक्षित है?

हाँ, डॉक्टर की निगरानी में की जाने वाली हल्की एक्सरसाइज क्रॉनिक लिवर डिजीज के मरीजों में मांसपेशियों के क्षय (सारकोपेनिया) को रोकने और शारीरिक क्षमता सुधारने में मददगार साबित होती है।

हेपेटाइटिस बी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?

हेपेटाइटिस बी से बचाव का सबसे असरदार तरीका इसका टीका (वैक्सीनेशन) है, जो इस गंभीर संक्रमण से पूरी सुरक्षा प्रदान करता है।