बृजभूषण सिंह और रेसलर्स की जंग के पीछे छुपा है यह गहरा राज, पढ़े पूरी कहानी
पिछले एक सप्ताह से दिल्ली का जंतर-मंतर पहलवानों का अखाड़ा बना हुआ है और इसको लेकर कई प्रकार की खबरे भी सामने आ रही है। लेकिन इसमें एक बड़ी बात सामने आ रही है यूपी के नेताजी कहे जाने वाले भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के खिलाफ अभी तक सपा पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अब तक कोई बयान नहीं दिया है। जबकि पूरा विपक्ष खिलाड़ियों के साथ खड़ा है और उनका आरोप है कि बृजभूषण सिंह ने यौन उत्पीड़न किया है तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पहलवान बृजभूषण सिंह के खिलाफ एक्शन लेने की मांग पर अड़े तो खिलाड़ियों की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कर ली। पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ तो बृजभूषण सिंह ने पहलवानों को लेकर किया बड़ा दावा किया है जिसके बाद किसी से जवाब बनता नहीं आ रहा है। विनेश फोगाट ने आरोप लगाया, महिला पहलवानों के साथ यौन उत्पीड़न हुआ है और इसके सबूत उनके पास है। अगर जरूरत पड़ी तो वह सबके सामने इसको पेश करेगी।
इस मामले को लेकर बृजभूषण ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह साजिश कांग्रेस नेता दीपेंदर हुड्डा और बजरंग पुनिया के द्वारा रची गई है। इसका सबूत उनके पास है और सही समय पर यह सबूत दिल्ली पुलिस को सौंंप दिया जाएगा। अगर खिलाड़ियों को मेरे अध्यक्ष पद से नाराजगी है तो मैं अपना पद छोड़ दुंगा लेकिन उनके द्वारा जो आरोप लगाए जा रहे है वह गलत है। क्योंकि खिलाड़ी अपने मन से नहीं बल्कि राजनीतिक पार्टियों के चक्कर में आकर ऐसे आरोप लगा रहे हैं।
बृजभूषण सिंह ने दावा किया इस आंदोलन का जन्म पॉलिसी बदलने और नए नियम बनाने के बाद से हुआ है।नवंबर 2021 में फेडरेशन ने नियमों में बदलाव करते हुए तय किया कि ओलंपिक के लिए चुने जाने वाले खिलाड़ी पहले ट्रायल्स में भाग लेंगे जबकि पहले ऐसा नहीं था।
इससे पहले जो खिलाड़ी ओलंपिक कोटा हासिल कर लेता था, उसे टीम में जगह मिल जाती थी लेकिन इसके बाद खिलाड़ी चोटिल हो जाते हैं या फॉर्म में नहीं रहते है उनको इसका फायदा मिलता था। वह ओलंपिक खेलने तो चले जाते है लेकिन मेडल मिलने की संभावनाएं बहुत कम हो जाती है। पहले एक ही राज्य से ज्यादा पहलवान ओलंपिक जाते थे लेकिन अब सभी राज्यों को मौका दिया जा रहा है।
नए नियम के बाद कोई भी राज्य नेशनल में एक से ज्यादा टीम नहीं भेज सकता।
ओलंपिक के बाद कोई भी खिलाड़ी नेशनल नहीं खेलता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सभी खिलाड़ी ट्रायल दें और नेशनल गेम्स में हिस्सा लें ताकि उनका प्रदर्शन अच्छा बना रहे।
नियमों में बदलाव के बाद सबसे ज्यादा खतरा हरियाणा के पहलवानों पर होने की बात सामने आ रही है।
पहलवानी के लिए सभी राज्यों को मौका मिलना चाहिए।
टोक्यो ओलंपिक में भारत से 127 खिलाड़ी गए थे, उनमें से 30 हरियाणा के पहलवान थे।

