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सीएम गहलोत का चुनावी मास्टर स्ट्रोक,नए जिलों के बहाने बीजेपी और पायलट का सफाया!

प्रकाशित: Mar 18, 2023 03:36रिपोर्ट: Navtej TV

राजस्थान में चुनावी साल के आखीरी बजट सत्र में सीएम गहलोत ने एक साथ इतनी घोषणाओं की झड़ी लगा दी है जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था। राजस्थान का गठन हुआ तब 19 रियासते और 3 ठिकाने थे उसके बाद नए जिले बने जो लगभग 30 के करीब थे लेकिन सीएम गहलोत ने विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए एक ही झटके में 19 नए जिले और 3 नए संभाग बना दिए। प्रदेश देश का सबसे बड़ा क्षेत्रफल लेकिन उसके जिलों की संख्या बहुत कम थी लेकिन गहलोत ने एक ही झटके में जिलों की हाफ सेंचुरी लगा दी।

इसका जवाब किसी के पास नहीं है क्योंकि कुछ दिन पहले तो नए जिले बनाने वाली कमेटी का समय बढ़ाया गया था क्योंकि उसका काम पूरा नहीं हुआ था लेकिन अचानक से बजट सत्र के अंत में नए जिलों की घोषणा कर दी गई। इस बात को लेकर सवाल खड़े हो रहे है कि जब कमेटी ने रिपोर्ट पहले ही सौंप दी थी तो फिर उसका कार्यकाल किस लिए बढ़ाया गया है।

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इस घोषणा के बाद कई जगह विवाद भी उठा है लेकिन इसके पिछे का कारण पायलट को माना जा रहा है। पायलट ने जब भी किसी मांग को लेकर न्याय की मांग की है तो उस मांग को पूरा नहीं किया गया है। पहले जब रीट भर्ती को लेकर मांग की तो उस पर कुछ नहीं हुआ इसके बाद विरांगनाओं को लेकर कार्यवाही की मांग की तो उस पर कुछ नहीं हुआ और कुछ दिन पहले जब पायलट ने नए जिलों की मांग को लेकर चिट्टी लिखी तो उस समय जिलों की घोषणा नहीं की गई। इसका मतलब पायलट को लेकर गहलोत की नाराजगी अभी दूर नहीं हुई है और इसी वजह से सवाल खड़ा हो रहा है कि जो भी जिले बने है वह आने वाले चुनावों में सीएम गहलोत के लिए फायदेमंद साबित हो सकते है।

पायलट के साथ गहलोत ने बीजेपी को बड़ा झटका दिया है बीजेपी नए जिलों को लेकर इतना ज्यादा सोच नहीं नहीं रही थी। लेकिन नए जिलों के बनने से बीजेपी को बड़ा झटका दिया है लेकिन इसके साथ ही गहलोत ने अपने भरोसेमंद विधायकों को नया जिला इनाम में दिया है। जयपुर को चार हिस्सों में बाट दिया लेकिन इसका कितना फायदा होगा कितना नुकसान होगा लेकिन इसका पता आने वाले समय में चलेगा।

पाली को बीजेपी का गढ़ माना जाता है और इसी वजह से सांचौर को जिला बनाकर एक नया कार्ड खेला है। लेकिन हाड़ौती संभाग में किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ ना कोई जिला बना इसको लेकर भी चर्चा हो रही है। कमेटी के 60 नए जिले बनाने की मांग आई थी लेकिन 19 नए जिले बने है और गोविन्द सिंह डोटासारा की मांग भी पूरी हुई अब सीकर नया संभाग बना है। आदिवासी जिलों का विशेष ध्यान रखा गया है कि क्योंकि कांग्रेस यहां भी कमजोर हो रही थी तो बासंवाड़ा को संभाग बनाया गया।