गुजरात को 25 साल पुराने जख्म देने आया बिपरजॉय,कपड़ों की तहर लटकी थी लाशें, देखें पूरी रिपोर्ट
इन दिनों पूरे देश में बिपरजॉय का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर गुजरात में देखने को मिलेगा। इस खतरे को देखते हुए पहले से तैयारी की जा रही है लेकिन इसके बाद भी भारी नुकसान होने के आसार नजर आ रहे हैं। लेकिन यह तूफान गुजरात को 25 साल पूराना जख्म देने आया है क्योंकि इससे पहले भी ऐसा एक तूफान आया था जिसने गुजरात के तटीय इलाकों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया था।
9 जून 1998 में गुजरात के कांडला पोर्ट 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और थोड़ी देर में इनकी गती 200 किमी प्रति घंटे पर पहुंच गई। इसके बाद देखते ही देखते लोग हवा में उड़ने लग गए और किसी को समझ नहीं आता उससे पहले उसने कई लोगों को अपनी चपेट में ले लिया।
मरने वालों की संख्या 1500 बताई गई तो 1,700 लोग लापता हो गए जिनका आज तक कोई अता-पता नहीं है। इसके कारण 10 हजार से ज्यादा पशुओं की मौत हुई लेकिन इसके बाद जो हालात हुए उसके यादे आज भी लोगों को डरा देती है। 25 साल पुरानी कहानी एक बार फिर ताजा होने जा रही है। तूफान इता भयानक था कि 2 महीने तक लाशें मिलती रही थीं और कुछ शव पाकिस्तान के तट पर जा पहुंचे थे।
जब एक साथ श्मशान में इतने सारे शव पहुंचे तो हालात बिगड़ गए और इसके चलते शवों को पेट्रोल और डीजल छिड़ककर जलाया गया। अगर ऐसा नहीं करते तो महामारी फैलने का खतरा बढ़ जाता। इसके बाद कच्छ और भुज के कई गांवों में 3 महनों तक ब्लैकआउट रहा था।
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इतना बड़ा नुकसान होने का प्रमुख कारण समय पर सूचना नहीं मिलना था। तूफान 200 किमी की स्पीड से आगे बढ़ रहा था लेकिन खबर मिली की वह कमजोर पड़ गया है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और सावधानी नहीं रखी गई तो इतना ज्यादा नुकसान हुआ। लेकिन अब सूचना का माध्यम अच्छा है और समय रहते ही तैयारी कर लगई है जिसके कारण ज्यादा नुकसान की कोई संभावना नहीं है।
लेकिन केंद्र सरकार ने पहले ही इसको लेकर सभी प्रकार की तैयारी करने के साथ तटीय इलाकों से लोगों को दूर कर दिया गया है। इस तूफान का असर 15 से 18 तक रहेगा और राजस्थान के 10 जिलों में तेजी बारिश की संभावना जताई गई है।

