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गणेश चतुर्थी 2026: बप्पा की स्थापना के साथ कलश पूजन का महत्व, सामग्री और शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश की स्थापना के साथ कलश रखा जाता है, जिसमें जल, अक्षत, सिक्का और सुपारी रखी जाती है। पूजा का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक है।

प्रकाशित: Sep 09, 2026 22:32रिपोर्ट: HarshitaIndiaVerified

मुख्य बातें

  • गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी।
  • चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह से 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी।
  • मध्याह्न पूजा मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है।
  • कलश में जल, अक्षत, सिक्का, सुपारी और आम के पत्ते रखे जाते हैं।

गणेश चतुर्थी के पर्व पर भगवान गणेश की स्थापना के साथ घरों में कलश रखने की परंपरा का भी खास स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश को पवित्रता, मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। गणेशोत्सव के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं के मुताबिक कलश स्थापना की विधि में भिन्नता देखने को मिलती है।

कलश स्थापना और पूजन सामग्री

गणेश स्थापना के समय कलश तैयार करने की प्रक्रिया में साफ जल भरने के बाद उसमें अक्षत, सिक्का और सुपारी जैसी शुभ वस्तुएं डाली जाती हैं। इसके अलावा कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा भी प्रचलित है। कई पूजा-विधियों में नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित किया जाता है और उसके चारों ओर मौली बांधी जाती है।

स्थापना के दौरान सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करके एक चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाया जाता है। इसके बाद शुद्ध जल से भरे कलश को तय परंपरा के अनुसार तैयार कर गणेश जी की प्रतिमा के पास उचित स्थान पर रखा जाता है।

पूजा विधि और भोग

कलश स्थापना के बाद गणपति बप्पा की विधि-विधान से पूजा शुरू होती है। भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, अक्षत और चंदन अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। भोग के रूप में मोदक या लड्डू के साथ ताजे फल और अन्य मिठाइयां रखी जाती हैं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती की जाती है और मंत्र जाप किया जाता है।

गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त और तिथि

पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी।

पूजा के लिए मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक निर्धारित किया गया है। हालांकि, देश के अलग-अलग शहरों में समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना सही रहता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

कलश में रखी जाने वाली सामग्री को लेकर हर जगह एक जैसी परंपरा नहीं होती। कहीं केवल जल, आम के पत्ते और नारियल का प्रयोग होता है, तो कहीं अक्षत, सुपारी और सिक्का भी अनिवार्य रूप से रखा जाता है। अनुष्ठान में सबसे महत्वपूर्ण बात पूरी श्रद्धा, स्वच्छता और अपनी पारंपरिक पूजा-पद्धति का पालन करना है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गणेश चतुर्थी कब है?

गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी।

गणेश पूजा का मध्याह्न मुहूर्त क्या है?

गणेश पूजा का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। हालांकि शहर के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

गणेश स्थापना के समय कलश में क्या रखा जाता है?

कलश में साफ जल के साथ अक्षत, सिक्का और सुपारी रखी जाती है। कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा है।

भगवान गणेश को पूजा में क्या अर्पित किया जाता है?

गणेश जी को दूर्वा, फूल, अक्षत और चंदन अर्पित किया जाता है। भोग में मोदक, लड्डू, फल और मिठाइयां रखी जाती हैं।