झुंझुनूं के नवलडी गांव में राजकीय सम्मान के साथ हुआ पुलिस जवान पदम सिंह का अंतिम संस्कार, जयपुर में थे तैनात
जयपुर में तैनात राजस्थान पुलिस के जवान पदम सिंह का बीमारी के बाद निधन हो गया। बुधवार को उनके पैतृक गांव झुंझुनूं के नवलडी में पुलिस गार्ड ऑफ ऑनर और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
मुख्य बातें
- पदम सिंह जयपुर में राजस्थान पुलिस में तैनात थे।
- मंगलवार शाम को बीमारी के बाद उनका आकस्मिक निधन हुआ।
- बुधवार को झुंझुनूं के नवलडी गांव में कोठी रोड श्मशान भूमि पर अंतिम संस्कार हुआ।
- अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में तैनात राजस्थान पुलिस के जवान पदम सिंह का बीमारी के बाद निधन हो गया। बुधवार को उनके पैतृक गांव नवलडी में राजकीय और पुलिस सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह घर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
तिरंगा रैली के साथ दी अंतिम विदाई
मंगलवार शाम को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद पदम सिंह का निधन हो गया था। बुधवार सुबह उनकी पार्थिव देह जयपुर से झुंझुनूं के नवलडी गांव उनके पैतृक निवास पहुंची। शव पहुंचते ही पत्नी बेसुध हो गईं और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंतिम यात्रा से पहले पूरे गांव में तिरंगा रैली निकाली गई। ग्रामीणों ने 'पदम सिंह अमर रहे' और 'भारत माता की जय' के नारों के साथ जवान को विदाई दी।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ पंचतत्व में विलीन
कोठी रोड स्थित श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार से पहले पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके बेटे अशोक को तिरंगा सौंपा गया। नम आंखों के बीच जवान पदम सिंह पंचतत्व में विलीन हो गए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पदम सिंह कौन थे और वे कहाँ तैनात थे?
पदम सिंह राजस्थान पुलिस के जवान थे जो जयपुर शहर में तैनात थे।
जवान पदम सिंह का निधन कब और कैसे हुआ?
वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और मंगलवार शाम को उनका आकस्मिक निधन हो गया।
उनका अंतिम संस्कार कहाँ किया गया?
उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव झुंझुनूं के नवलडी स्थित कोठी रोड श्मशान भूमि में पुलिस सम्मान के साथ किया गया।
अंतिम संस्कार के दौरान तिरंगा किसे सौंपा गया?
अंतिम संस्कार से पहले राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा जवान के बेटे अशोक को सौंपा गया।





