हाथ छोड़ अब साइकिल पर सवार हुए कपिल सिब्बल, राज्यसभा के लिए भरा पर्चा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल किसी परिचय के मौहताज नहीं है क्योंकि वह राजनीति के साथ कानून के बहुत बड़े ज्ञाता भी है। सिब्बल देश के जाने माने वकील के साथ-साथ वह मनमोहन सरकार में सूचना प्रोद्योगिकी और विधि एवं न्याय मंत्री भी रह चुके है। तो आइए नजर डालते हैं उनके व्यक्तिगत जीवन पर..
सिब्बल का जन्म 8 अगस्त, 1948 जालंधर में हुआ। पिता का नाम हीरा लाल सिब्बल और माता का नाम कैलाश रानी सिब्बल है। वह बचपन से ही जीवन में कुछ बड़ा करने को लेकर बहुत महनत किया करते थे और इसी वजह से वह पढ़ाइ्र के दिल्ली आ गए और सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में एमए किया।
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इसके बाद उन्होंने कानून की दुनिया में अपने कदम रखें और एक के बाद एक बड़े पदों पर आसीन होते चले गए। कपिल सिब्बल ने 1973 में नीना सिब्बल से विवाह किया और उनके दो पुत्र हैं जो भारत में वकालत कर रहे हैं। सिब्बल देश के सबसे महंगे वकीलों में आते है।
सिब्बल ने पहली बार 1998 में राज्यसभा के जरिए राजनीति में अपने कदम रखे और इसके बाद दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने। इसके बाद वही कई सालों तक चांदनी चौक से चुनाव लड़ते रहे। सिब्बल के बोलने के तौर तरीके नरसिम्हाराव काफी प्रभावित हो गए थे और उन्होंने 1996 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का टिकट ऑफर किया और चुनाव लड़े।
लेकिन उन्हें भाजपा की सुषमा स्वराज ने उनको हरा दिया और सांसद बनने का सपना टूट गया। इसके बाद लालू प्रसाद यादव ने सिब्बल को राज्य सभा में भेज दिया लेकिन वह लोकसभा का चुनाव लड़कर सांसद बनाना चाहते थे। इसी वजह से 2004 के लोकसभा चुनाव में सिब्बल ने भाजपा की स्मृति ईरानी को हराकर लोकसभा पहुंचे और इसके बाद वह यहां से चुनाव जीतते रहे।

सिब्बल को सभी लोग राजनेता और एक अच्छा वकील मानते है लेकिन वह अच्छे कवि है इसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। सिब्बल की कविताओं को सुनकर हर कोई दिवाना हो जाता है। सिब्बल की 1 दिन कि पैरवी करने की फीस 10 लाख से ज्यादा की होती है लेकिन जब उनकी पुरानी पार्टी कांग्रेस से जुड़ा कोई केस होता था तो वह कोई फीस नहीं लेते थे।
लेकिन 2014 के बाद मोदी सरकार बनी तो उन्होंने कांग्रेस को समय-समय पर सुझाव दिए लेकिन उनकी बात को ज्यादा महत्व नहीं दिया। कई बार तो उन्होंने खुलकर राहुल गांधी तक पर आरोप लगाए लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस में कोई बदलाव नहीं आया और हाल ही में जब उदयपुर में चिंतिन शिविर हुआ तो सिब्बल ने इसमें भाग नहीं लिया था और उसी समय यह संकेत मिल गया था कि वह जल्द ही पार्टी छोड़ेंगे। अब उन्होंने सपा की साइकिल पर बैठने का फैसला किया तो सपा ने उनको राज्यसभा भेजने का फैसला किया है।





