ऑपरेशन ब्लू स्टार की खौफनाक कहानी: 500 लोगों की मौत, 80 जवान शहीद...जानें पूरा इतिहास
ऑपरेशन ब्लू स्टार की जब भी चर्चा होती है तो इतिहास के सबसी खौफनाक कहानी की यादे ताजा हो जाती है। इस घटना ने भारत के इतिहास को बदल कर रख दिया था। इस ऑपरेशन के जख्म आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। आज ऑपरेशन ब्लू स्टार के 39 साल पूरे हो गए हैं लेकिन यादे आज भी ताजा है।
बात 70 के दशक की है जब अकाली दल पंजाब को स्वायत राज्य बनाने की मांग कर रहा था। इसी मांग को लेकर 1973 में आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित किया गया। अकाली दल केंद्र सरकार से मांग कर रहा था की केवल रक्षा, विदेश नीति, संचार और मुद्रा को छोड़कर सभी अधिकार पंजाब को दे दें। इन मांगों को लेकर पंजाब में हिंसा होनी शुरू हो गई और इस बीच हिंद समाचार-पंजाब केसरी अखबार समूह के संपादक लाला जगत नारायण की हत्या ने तो बहुत बड़ा कोहराम मचा दिया।
पंजाब पुलिस के उपमहानिरीक्षक एएस अटवाल की दिन दहाड़े स्वर्ण मंदिर परिसर में गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने दरबारा सिंह की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।
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इस प्रकार की हिंसक घटनाओं का आरोप भिंडरावाले पर लगा और पंजाब अब धीरे-धीरे अलगाववाद की चपेट में जलने लगा। तत्कालीन इंदिरा गांधी की सरकार को चुनौती देने के लिए धार्मिक गुरु जरनैल सिंह भिंडरावाले की अगुआई में अलगाववादियों ने गोल्डन टेंपल को अपना केंद्र बनाया। केंद्र सरकार को गोल्डन टेंपल से अलगाववादियों को बाहर निकालने के लिए 1984 में 1 जून से 6 जून तक सैन्य कार्रवाई कर दी।
इस काम को पूरा करने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार नाम दिया गया। इस दौरान सेना और अलगाववादियों के मध्य भीषण जंग हुई जिसमें 80 से ज्यादा सैनिक शहीद हुए। इस पवित्र जगह पर खून-खराबा हुआ। स्वर्ण मंदिर पर गोलियां दागी गईं और यहां का प्राचीन पुस्तकालय जल गया।





