आलाकमान के आश्वासनों से तंग आकर पायलट ने चली अपनी अंतिम चाल, जल्द होगा नया ऐलान!
राजस्थान कांग्रेस में विधानसभा चुनावों से पहले मौजूदा सियासी हालात बहुत ही खराब होते दिख रहे है। पंजाब में भी इस प्रकार के हालात देखे गए थे जिसके बाद पार्टी को इसकी किमत हार के रूप में चुकानी पड़ी थी लेकिन राजस्थान में गहलोत-पायलट के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। पायलट ने बीजेपी राज मे हुए भष्ट्राचार को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मौर्चा खोल दिया है। लेकिन उनका ऐसा करना भी जायज था क्योंकि दिल्ली आलाकमान से उनको लगातार आश्वासन मिल रहे है और वह इन से तंग आ चुके है।
पायलट का यह दाव आने वाले समय में बहुत कुछ बदल सकता है क्योंकि पायलट के इस बगावती तेवर पर दिल्ली बैठे नेताओं की नींद उड़ गई है। पायलट से बात करने के लिए रंधावा जयपुर आ रहे है और उन्होंने कहा कि अगर उनको इस प्रकार की बात करनी थी तो पहले मेरे से मिलते। लेकिन पायलट की जो शिकायत है उसको लेकर बात की जाएगी तो गहलोत गुट के मंत्री खाचरियावास ने समर्थन किया है।
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आने वाले दिनों में पायलट पर कुछ बड़ा फैसला नहीं किया जाता है तो वह कुछ बड़ा कदम उठा सकते हैं। क्योंकि उनको लेकर हनुमान बेनीवाल ने बड़ा बयान दिया था और जल्द ही उनको फैसला लेना होगा ताकि इसका फायदा उन्हें मिले। राजनीति के जानकारों की माने तो वह पार्टी छोड़कर जाने का मन बना चुके है लेकिन वह बीजेपी में शामिल नहीं होंगे।
राजनीतिक गलियारों में पायलट और बेनीवाल के नए गठबंधन की चर्चा हो रही है क्योंकि दोनों नेताओं की राजस्थान में अच्छी पकड़ है। अगर दोनों एक साथ मिलकर चुनाव लड़ते है तो इसका नुकसान बीजेपी और कांग्रेस को उठना पड़ेगा जो दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
पायलट की नाराजगी दूर होने का नाम नहीं ले रही है क्योंकि गहलोत गुट के समर्थक नेता हर दिन आरोप लगाते रहते है। कांग्रेस के लिए बड़ा झटका हो सकता है अगर पायलट पार्टी छोड़ देते है तो क्योंकि फिर कांग्रेस में कोई बड़ा युवा चेहरा नहीं बचेगा। उनके साथी पहले ही बीजेपी में शमिल हो चूके है और अब पायलट का जाना कांग्रेस पर ही सवाल खड़ा करेगा।
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कांग्रेस दोनों नेताओं का खोना नहीं चाहती और गहलोत ने तो प्रण ले लिया है कि पायलट उनके रहते सीएम कभी नहीं बन सकते। क्योंकि उन्होंने सीएम पद के लिए तो कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष पद तक को गंवा दिया था और इसके बाद साफ हो गया कि गहलोत राजस्थान नहीं छोड़ना चाहते है।





