Sheetala Ashtami 2023: चाकसू में शील की डूंगरी में लगा मेला, जानें शीतला माता की पूरी कहानी
होली के 8 दिन बाद शीतलामाता के मेले का आयोजन होता है और आज प्रदेश में शीतलाष्टमी का पर्व बड़े धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। राजस्थान में हर जगह शीतला माता की पूजा की जा रही है और आज ठंडे पकवानों का भोग लगाया जाता है। आज के दिन गर्म खाने का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और इसके पीछे एक कहानी है।
शीतला अष्टमी कब मनाई जाती है
शीतला अष्टमी का पर्व चैत्र महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। ये पर्व माता शीतला को समर्पित है है,शीतला माता देवी पार्वती का अवतार हैं। उनका वाहन गधा है और उनका पुजारी कुम्हार है।
चेचक और अन्य रोगों को ठीक करने के कारण इनकी हर घर में पूजा की जाती है।
शीतला माता की कहानी
प्राचीन समय में शीतला माता ने धरती पर एक बुजुर्ग महिला का रूप ले लिया और इसके बाद वह राजस्थान के गांवों में घूमने लगी। इस दौरान एक महिना ने शीतला माता पर चावल का उबलता हुआ पानी डाल दिया। जिसके कारण उनके शरीर में छाले निकल आए और उनको बहुत जोर से जलन होने लगी। इसके बाद वह सब के घरों में जाकर मदद मांगी लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की और सभी ने उनको घर से बाहर निकाल दिया।
लेकिन जब वह कुम्हार के पास पहुंची तो उस कुम्हार की पत्नी ने शीतला माता को देखकर उनकी मदद करने का प्रयास किया। कुम्हार की पत्नी शीतला माता पर एक मटके से ठंडा पानी डाला, घर में रात की बनी हुई राबड़ी और दही खाने को दिया। इसके बाद शीतला माता की तीसरी आंख का राज कुम्हार की पत्नी को चला तो वह डर गई लेकिन शीतला माता ने अपनी सच्चाई बताई तो उसे सारी बात समझ में आ गई।
इसके बाद से जयपुर जिले के चाकसु में शील की डुंगरी में उनका प्रसिद्व मंदिर बनाया गया और जहां हर साल मेला भरता है। जिसमें लाखों की संख्या में भक्तगण आते है और एक दिन पहले बने ठंडे पकवानों का भोग लगाते है।


