स्मार्टफोन की बैटरी 20% पर आते ही क्यों तेजी से खत्म होती है? जानिए इसके पीछे की तकनीकी वजह
स्मार्टफोन की बैटरी 20% पर आने के बाद इसलिए तेजी से खत्म होती है क्योंकि इस स्तर पर बैटरी का वोल्टेज गिरने लगता है और सिस्टम को फोन चालू रखने के लिए अधिक करंट खींचना पड़ता है।
मुख्य बातें
- 20% बैटरी के बाद वोल्टेज में अचानक और तेजी से गिरावट आती है।
- स्मार्टफोन्स में लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है।
- बैटरी की लंबी उम्र के लिए 20-80 रूल का पालन करना सबसे अच्छा माना जाता है।
स्मार्टफोन इस्तेमाल करते समय अक्सर यह अनुभव किया होगा कि बैटरी 100% से 20% तक पहुंचने में काफी समय लेती है, लेकिन लाल निशान पार करते ही कुछ ही मिनटों में स्विच ऑफ हो जाती है। बैटरी का यह अचानक तेजी से डिस्चार्ज होना कोई भ्रम नहीं, बल्कि इसके पीछे एक ठोस तकनीकी और वैज्ञानिक वजह होती है।
स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी का चार्ज परसेंटेज किसी टंकी में बचे पानी की तरह सीधी गणना से काम नहीं करता है। बैटरी का वोल्टेज, करंट, तापमान और इस्तेमाल के पैटर्न जैसे आंकड़ों के आधार पर फोन यह अनुमान लगाता है कि बैटरी में कितनी चार्ज बची है। एपल जैसी दिग्गज कंपनियां भी मानती हैं कि बैटरी परसेंटेज और क्षमता का आकलन अलग-अलग एल्गोरिदम के आधार पर किया जाता है।
वोल्टेज में गिरावट और करंट का दबाव
आजकल के लगभग सभी स्मार्टफोन्स में लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है, जिनके डिस्चार्ज होने का ग्राफ एक बराबर तरीके से काम नहीं करता है। जब बैटरी 100% से 30% के बीच होती है, तो इसका वोल्टेज स्थिर रहता है। लेकिन जैसे ही क्षमता 20% के स्तर से नीचे जाती है, इसके वोल्टेज में अचानक और बहुत तेजी से गिरावट आने लगती है।
फोन के प्रोसेसर, डिस्प्ले और बैकग्राउंड एप्स को सुचारू रूप से काम करने के लिए लगातार एक निश्चित मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है। विज्ञान के नियम के अनुसार, जब 20% के नीचे बैटरी का वोल्टेज कम हो जाता है, तो फोन को चालू रखने के लिए सिस्टम को बैटरी से अधिक करंट खींचना पड़ता है। ज्यादा करंट खींचने की इसी मजबूरी के कारण बची हुई बैटरी दुगनी रफ्तार से खत्म होने लगती है।
सॉफ्टवेयर कैलिब्रेशन और पुरानी बैटरी का असर
जैसे-जैसे फोन पुराना होता है, बैटरी के अंदर मौजूद केमिकल्स की क्षमता कम होने लगती है। इससे बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध बढ़ जाता है और कुछ ऊर्जा फोन को पावर देने के बजाय गर्मी के रूप में बर्बाद होने लगती है। कई बार फोन का सॉफ्टवेयर भी बैटरी के सही स्तर का सटीक अंदाजा नहीं लगा पाता है। स्क्रीन पर भले ही 20% दिख रहा हो, लेकिन हकीकत में बैटरी के अंदर उससे कम चार्ज बची होती है।
बैटरी लाइफ बचाने का '20-80 रूल'
टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्मार्टफोन की बैटरी को कभी भी पूरी तरह 0% यानी डिस्चार्ज नहीं होने देना चाहिए। बैटरी की लंबी उम्र के लिए '20-80 रूल' का पालन करना सबसे बेहतर माना जाता है। फोन की बैटरी 20% पर आते ही उसे चार्जिंग पर लगा दें और 80% से 90% होने पर हटा लें। इस तरीके से बैटरी के केमिकल्स पर दबाव कम पड़ता है और फोन लंबे समय तक बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
फोन की बैटरी 20% पर आते ही तेजी से क्यों डिस्चार्ज होती है?
20% के नीचे बैटरी का वोल्टेज तेजी से गिरता है। फोन को चालू रखने के लिए सिस्टम को बैटरी से अधिक करंट खींचना पड़ता है, जिससे बची हुई बैटरी दुगनी रफ्तार से खत्म होने लगती है।
क्या स्क्रीन पर दिखने वाला बैटरी परसेंटेज पूरी तरह सटीक होता है?
नहीं, स्क्रीन पर दिखने वाला प्रतिशत एक अनुमानित स्टेट ऑफ चार्ज है। यह वोल्टेज, तापमान और इस्तेमाल के पैटर्न के आधार पर तय होता है, जो वास्तविक स्थिति से थोड़ा अलग हो सकता है।
स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ बढ़ाने के लिए कौन सा नियम सबसे अच्छा है?
बैटरी की लंबी उम्र के लिए '20-80 रूल' का पालन करना सबसे बेहतर माना जाता है। बैटरी 20% पर आते ही चार्जिंग पर लगाएं और 80% से 90% के बीच हटा लें।
स्मार्टफोन में किस प्रकार की बैटरी का उपयोग किया जाता है?
आजकल के लगभग सभी आधुनिक स्मार्टफोन्स में लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है, जिनके डिस्चार्ज होने का ग्राफ एक समान नहीं होता है।



