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सोशल मीडिया नियमों में बड़ा बदलाव: आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए कंपनियों को मिला सिर्फ 3 घंटे का अल्टीमेटम

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नए निर्देशों के मुताबिक, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट की शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर उसे हटाना अनिवार्य कर दिया गया है।

प्रकाशित: Aug 06, 2026 19:55रिपोर्ट: HarshitaNew Delhi, IndiaVerified

मुख्य बातें

  • आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की समयसीमा 24-36 घंटे से घटाकर 3 घंटे की गई
  • नियमों का पालन न करने पर आईटी अधिनियम की धारा 79 का
  • डीपफेक, एआई-जनरेटेड फर्जी कंटेंट और CSAM पर विशेष सख्ती होगी

केंद्र सरकार ने डिजिटल स्पेस को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी नए निर्देशों के तहत, अब किसी भी आपत्तिजनक, गैर-कानूनी या संवेदनशील सामग्री की शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर उसे प्लेटफॉर्म से हटाना अनिवार्य कर दिया गया है।

पहले सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसी सामग्री हटाने के लिए 24 से 36 घंटे का समय मिलता था। सरकार का मानना है कि डिजिटल दौर में डीपफेक और भ्रामक वीडियो कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक सुरक्षा को बड़ा नुकसान होता है। इस त्वरित फैलाव को रोकने के लिए ही समयसीमा को घटाकर तीन घंटे किया गया है।

किन Content पर होगी तत्काल कार्रवाई?

नए नियमों के दायरे में विशेष रूप से डीपफेक और एआई-जनरेटेड content को रखा गया है। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले फर्जी वीडियो और तस्वीरें, बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक Content (CSAM), बिना सहमति के साझा की गई व्यक्तिगत व अश्लील सामग्री और देश की संप्रभुता को प्रभावित करने वाली भ्रामक खबरें शामिल हैं। इन श्रेणियों से जुड़ी शिकायत मिलने पर प्लेटफॉर्म्स को बिना देर किए एक्शन लेना होगा।

आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत जाएगी कानूनी सुरक्षा

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तय तीन घंटे की समयसीमा का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्म्स को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाले 'सेफ हार्बर' का कानूनी संरक्षण खो देंगी। इसके बाद संबंधित कंपनियों को महज मध्यस्थ नहीं माना जाएगा, बल्कि उन्हें सीधे तौर पर आपराधिक और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सोशल मीडिया कंपनियों को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए कितना समय दिया गया है?

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अब किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी सामग्री की सूचना मिलने के महज 3 घंटे के भीतर उसे हटाना अनिवार्य कर दिया गया है।

पहले सोशल मीडिया कंपनियों के पास कंटेंट हटाने के लिए कितना समय था?

इससे पहले सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के लिए 24 से 36 घंटे का समय मिलता था, जिसे अब घटाकर 3 घंटे कर दिया गया है।

नियमों का पालन न करने पर कंपनियों पर क्या कार्रवाई होगी?

तय 3 घंटे की सीमा का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म्स आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाला 'सेफ हार्बर' कानूनी संरक्षण खो देंगे और उन्हें सीधे आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

किन मुख्य कंटेंट को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं?

डीपफेक और एआई-जनरेटेड फर्जी वीडियो, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), बिना सहमति के साझा की गई अश्लील कंटेंट और देश की संप्रभुता को प्रभावित करने वाली भ्रामक खबरें तुरंत हटानी होंगी।