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टाटा इंटरनेशनल पर मंडरा रहा दिसंबर का संकट: 800 करोड़ के बॉन्ड चुकाने का वक्त, वरना ब्याज दरें आसमान छुएंगी

प्रकाशित: Oct 13, 2025 20:50रिपोर्ट: Navtej TV

टाटा ग्रुप की ट्रेडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी टाटा इंटरनेशनल (TIL) इस दिसंबर एक बड़े आर्थिक इम्तिहान से गुजरने वाली है। कंपनी को करीब ₹800 करोड़ के बॉन्ड (Non-Convertible Debentures — NCDs) चुकाने हैं।
अगर TIL ये बॉन्ड रिडीम करने में नाकाम रहती है, तो इन पर ब्याज दर 9.1% से बढ़कर 12.1% हो जाएगी — सीधा 3 प्रतिशत की छलांग!
यानि कंपनी का फाइनेंसिंग कॉस्ट और नकदी संकट, दोनों बढ़ जाएंगे।

🏢 TIL क्या करती है?

टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड (TIL), टाटा ग्रुप की वैश्विक ट्रेडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन शाखा है।
इसका काम दुनियाभर में कमोडिटी ट्रेडिंग, ऑटोमोबाइल, लेदर प्रोडक्ट्स, स्टील, एनर्जी और एग्रीकल्चर बिज़नेस से जुड़ा हुआ है।
कंपनी के 25 से ज़्यादा देशों में ऑपरेशन हैं और यह टाटा ग्रुप की “ग्लोबल ट्रेडिंग विंग” के रूप में जानी जाती है।
हालांकि पिछले कुछ सालों में इसका कारोबार तो बढ़ा है, लेकिन मुनाफ़े के बजाय नुकसान बढ़ा है — जो अब इसके लिए बड़ी चिंता बन चुका है।

💰 बॉन्ड की कहानी क्या है?

दिसंबर 2022 में टाटा इंटरनेशनल ने पुराने बॉन्ड चुकाने के लिए ये नए NCDs जारी किए थे। इनकी अवधि तीन साल की है, और दिसंबर 2025 में इनकी ‘पहली कॉल डेट’ आएगी — यानी कंपनी चाहे तो इन्हें इसी वक्त रिडीम कर सकती है।
तकनीकी रूप से ये बॉन्ड perpetual हैं — यानी कभी खत्म नहीं होते — लेकिन ब्याज दर का इतना बड़ा उछाल तय है कि रिडेम्पशन करना लगभग मजबूरी बन जाएगा।

📉 वित्तीय हालत कमज़ोर

कंपनी की FY24 रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इंटरनेशनल ने लगभग ₹28,000 करोड़ की आय दिखाई लेकिन ऑपरेटिंग मार्जिन सिर्फ 1% रहा।
कर्ज़ यानी नेट डेट सितंबर 2024 तक बढ़कर ₹4,100 करोड़ हो गया।
FY25 में टर्नओवर बढ़कर करीब ₹32,000 करोड़ हुआ, मगर कंपनी को फिर भी ₹477 करोड़ का नेट लॉस हुआ — कारण: ज्यादा कर्ज़, विदेशी मुद्रा में नुकसान और कमजोर ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस।

कुल कर्ज़ (जिसमें perpetual instruments भी शामिल हैं) ₹5,000 करोड़ से ऊपर बताया जा रहा है।
अगर कंपनी बॉन्ड चुकाने में देर करती है या रोलओवर करती है, तो हर साल करीब ₹24 करोड़ का अतिरिक्त ब्याज बोझ बढ़ जाएगा।

⚔️ टाटा ट्रस्ट्स के भीतर खींचतान

यह संकट टाटा ग्रुप के अंदर चल रहे मतभेदों को भी उजागर कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक, नोएल टाटा और वेनू श्रीनिवासन की अगुवाई वाला एक गुट हाल ही में विजय सिंह की दोबारा नियुक्ति पर भड़क गया था।
विजय सिंह, जो पहले रक्षा सचिव रह चुके हैं, ने पिछले महीने इस्तीफा दिया था।

अगस्त में हुई टाटा सन्स बोर्ड मीटिंग में डायरेक्टर हरीश मनवानी ने कहा कि “टाटा इंटरनेशनल को अब एक स्पष्ट दीर्घकालिक मकसद तय करना होगा, वरना यह कंपनी सिर्फ लेन-देन तक सीमित रह जाएगी।”
इस पर चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने माना कि थोड़ा कैपिटल डालने से राहत तो मिलेगी, मगर TIL की दिक्कतें स्ट्रक्चरल हैं, और कंपनी को ₹3,000 करोड़ तक की फंडिंग की ज़रूरत पड़ सकती है — जो मौजूदा योजना से तीन गुना ज्यादा है।

उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनी की स्थिति का एक इंटरिम रिव्यू अगले साल और फाइनल आकलन 2026 तक किया जाए।

🕰️ TIMELINE: TIL के हालिया सफर की झलक

📅 दिसंबर 2022 – ₹800 करोड़ के NCDs जारी हुए, पुराने बॉन्ड चुकाने के लिए।
📅 FY24 (मार्च 2024) – ₹28,000 करोड़ का राजस्व, सिर्फ 1% ऑपरेटिंग मार्जिन।
📅 सितंबर 2024 – कर्ज़ बढ़कर ₹4,100 करोड़ हुआ।
📅 FY25 (अनुमान) – ₹32,000 करोड़ टर्नओवर, ₹477 करोड़ का नुकसान।
📅 अगस्त 2025 – टाटा सन्स बोर्ड मीटिंग में ‘लॉन्ग टर्म स्ट्रेटेजी’ पर सवाल उठे।
📅 सितंबर 2025 – टाटा ट्रस्ट्स की बैठक में अंदरूनी मतभेद सामने आए।
📅 दिसंबर 2025 – NCD रिडेम्पशन की डेडलाइन!
👉 अगर कंपनी चूकती है, तो ब्याज दर 12.1% हो जाएगी और नकदी पर भारी दबाव पड़ेगा।

🧩 अब सवाल ये है...

क्या टाटा इंटरनेशनल दिसंबर में अपने बॉन्ड चुका पाएगी?
अगर नहीं — तो ब्याज दरें बढ़ेंगी, कर्ज़ का दबाव और नकदी की किल्लत भी बढ़ेगी।
ऐसे में टाटा ग्रुप को एक बार फिर अपनी ट्रेडिंग शाखा के बिजनेस मॉडल पर गंभीर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।