उज्जैन शिप्रा आरती विवाद: देशव्यापी विरोध की चेतावनी, जंतर-मंतर पर आंदोलन का ऐलान; हाईकोर्ट में भी याचिका दायर
उज्जैन के रामघाट पर पारंपरिक मां शिप्रा आरती की व्यवस्था और प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर तीर्थ पुरोहितों और प्रशासन में विवाद गहरा गया है। देश भर से आए पुरोहितों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी दी है और मामला हाईकोर्ट तक पहुँच चुका है।
मुख्य बातें
- देशभर के प्रमुख तीर्थों से पहुंचे पुरोहितों ने उज्जैन में मां शिप्रा का पूजन-अभिषेक किया।
- अखिल भारतीय तीर्थ महासभा ने सुनवाई न होने पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
- श्री क्षेत्र पंडा समिति ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की है।
- विवाद की शुरुआत करीब एक महीने पहले महाकाल मंदिर समिति के बटुकों द्वारा आरती कराए जाने के बाद हुई थी।
उज्जैन के रामघाट पर होने वाली पारंपरिक मां शिप्रा आरती की व्यवस्था को लेकर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों के बीच चल रहा विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ने लगा है। देश के विभिन्न प्रमुख तीर्थों से उज्जैन पहुंचे पुरोहितों ने महाकाल मंदिर समिति के हस्तक्षेप का कड़ा विरोध किया है। अखिल भारतीय तीर्थ महासभा ने सुनवाई न होने पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
बुधवार सुबह अयोध्या, नासिक, प्रयागराज, हरिद्वार, त्र्यंबकेश्वर, बैजनाथ धाम और कुरुक्षेत्र समेत देश के अलग-अलग तीर्थ क्षेत्रों से आए पुरोहितों ने रामघाट पर मां शिप्रा का पूजन-अभिषेक किया। इस दौरान पुरोहितों ने आरती की मौजूदा व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए पारंपरिक प्रणाली को ही बहाल रखने की मांग दोहराई। पूजन के बाद आयोजित अखिल भारतीय तीर्थ महासभा की कार्यकारिणी बैठक में आगे की रणनीति पर विचार किया गया।
शाम की धर्मसभा में तय होगी आंदोलन की रूपरेखा
शगुन गार्डन में आयोजित धर्मसभा में देशभर से आए तीर्थ पुरोहित और प्रतिनिधि शामिल हुए। सभा में रामघाट पर शिप्रा आरती के संचालन, महाकाल मंदिर समिति की भूमिका और पारंपरिक व्यवस्था में प्रशासनिक दखल को लेकर चर्चा की गई।
श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के मुताबिक, यदि प्रशासन ने पुरोहितों की आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को उज्जैन से बाहर राष्ट्रीय राजधानी तक ले जाया जाएगा। पुरोहितों का कहना है कि वे शहर के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के स्वरूप से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
करीब एक महीने से चल रहा है गतिरोध
यह विवाद लगभग एक महीने पहले शुरू हुआ था, जब महाकाल मंदिर समिति की ओर से प्रशिक्षित बटुकों से रामघाट पर शिप्रा आरती कराई गई थी। इसका पारंपरिक आरती करने वाले स्थानीय पुजारियों और पुरोहितों ने विरोध किया था। अगले दिन पुलिस और पुरोहितों के बीच झड़प और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बन गई थी, जिससे मामला और गरमा गया।
पुरोहितों का मुख्य आरोप है कि प्राचीन धार्मिक परंपरा को एक 'इवेंट' और टेंडर प्रक्रिया के जरिए संचालित किया जा रहा है। पंडित अमर डिब्बेवाला सहित अन्य पुरोहितों का तर्क है कि महाकाल मंदिर के बटुकों से आरती कराना और इसे टेंडर व्यवस्था से जोड़ना परंपरा की मूल भावना के खिलाफ है।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
प्रशासन और पुरोहितों के बीच का यह टकराव अब न्यायपालिका के दरवाजे पर भी पहुंच चुका है। श्री क्षेत्र पंडा समिति, उज्जैन ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की है।
याचिका में शासन-प्रशासन के हस्तक्षेप पर रोक लगाने और रामघाट पर पारंपरिक आरती शांतिपूर्वक जारी रखने की अनुमति देने की मांग की गई है। इस बीच, अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष पंडित रामकृष्ण तिवारी, नवीन नगर, मधु चकाहा, अमित राज पुरोहित, अनुज मिश्रा, श्रीकांत वशिष्ठ और नंदकुमार मिश्रा सहित कई प्रमुख चेहरे इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उज्जैन में शिप्रा आरती को लेकर विवाद क्यों चल रहा है?
विवाद की मुख्य वजह महाकाल मंदिर समिति द्वारा रामघाट पर बटुकों से आरती कराना और इसे टेंडर प्रक्रिया के जरिए संचालित करना है। पारंपरिक पुजारियों का आरोप है कि इससे सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का स्वरूप बदल रहा है।
अखिल भारतीय तीर्थ महासभा ने क्या चेतावनी दी है?
अखिल भारतीय तीर्थ महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि पारंपरिक व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो इस विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
क्या यह मामला अदालत में भी पहुंचा है?
हाँ, श्री क्षेत्र पंडा समिति, उज्जैन ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर कर पारंपरिक शिप्रा आरती में प्रशासनिक हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है।
किन-किन तीर्थ क्षेत्रों से पुरोहित उज्जैन पहुंचे हैं?
अयोध्या, नासिक, प्रयागराज, हरिद्वार, त्र्यंबकेश्वर, बैजनाथ धाम, कुरुक्षेत्र, मथुरा और रामेश्वरम समेत देश के प्रमुख तीर्थों से पुरोहित उज्जैन पहुंचे हैं।




