नई संसद: 28 मई को फिर ताजा होगी 15 अगस्त 1947 की याद, जानें सेंगोल की पूरी कहानी
28 मई को भारत देश को नई संसद मिलने जा रही है लेकिन इसको लेकर विपक्षी दलों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। लेकिन इसके बाद भी बीजेपी ने कहा जो जैसी सोच रखेगा वह वैसा करेगा। इस बीच गृहमंत्री अमित शाह ने कहा नई संसद के उद्घाटन के मौके पर तमिलनाडु से आए विद्वान पीएम मोदी को सेंगोल देंगे क्योंकि इसको राजदंड का प्रतिक माना जाता है।
भारत जब आजाद हुआ था तो पहले पीएम को भी सौंपा गया था। 15 अगस्त 1947 की आधी रात को नेहरू को यह भेट किया गया था। इससे पहले भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने नेहरू को पीएम बनने से पहले पूछा कि आप देश की आजादी को किसी खास तरह के प्रतीक के जरिए जश्न के रूप में मनाना चाहते है। इसके बाद वह सी. राजगोपालाचारी के पास गए तो उन्होंने नेहरू को इसके बारे में बताया क्योंकि राजगोपालाचारी मद्रास के सीएम रह चुके थे और उन्हें राजदंड भेंट करने वाली तमिल परम्परा के बारे में जानकारी थी।
बताया जाता है कि देश का महायाजक नए राजा को सत्ता ग्रहण करने पर एक राजदंड भेंट करता है यह एक प्राचीन परंपरा है। इस बात सुनकर नेहरू ने इसकी जिम्मेदारी राजगोपालाचारी को दे दी।
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राजगोपालाचारी ने थिरुवदुथुरै अधीनम मठ से संपर्क किया तो उन्हें राजगुरू के बीमार होने की सुचना मिली। इसके बाद राजदंड बनाया गया और इसको दिल्ली भेजने के लिए एक विशेष विमान की व्यवस्था की गई। 14 अगस्त 1947 को रात के 11.45 बजे राजदंड माउंटबेटन को दिया गया। इसके बाद इस राजदंड को इलाहाबाद संग्रहालय में रखा गया था। इस बात की जानकारी पीएम मोदी को हुई तो उन्होंने इसको नई संसद में रखने की बाम कही तो इस पर विचार किया गया।
15 अगस्त, 1947 की याद को दोहराते हुए वही समारोह 28 मई, 2023 को नई दिल्ली में संसद में दोहराया जाएगा। सेंगोल का इतिहास मौर्य साम्राज्य में मिलता है और जब भी कोई भारत पर शासन करता था तो वह इसका इस्तेमाल करता था।





